"अबुआ आवास योजना में दस्तावेजों से छेड़छाड़ का आरोप, BNS की धारा 217 और 256 के तहत हो सकती है कार्रवाई"
आवास के लिए दर-दर भटक रही कविता देवी, जर्जर घर में परिवार संग रहने को मजबूर

Jharkhand Medininagar Palamu जिले के लेस्लीगंज प्रखंड के झरकटिया गांव की निवासी कविता देवी आज भी अबुआ आवास योजना के लाभ की उम्मीद लगाए बैठी हैं। गंभीर आर्थिक तंगी, पति और ससुर की बीमारी तथा जर्जर मकान में रहने की मजबूरी ने उनके परिवार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। बरसात के मौसम में उनका कच्चा मिट्टी का घर कभी भी ढह सकता है, जिससे परिवार लगातार भय के साए में जीवन बिता रहा है।
"ST वर्ग की मनीता देवी को रिकॉर्ड में जनरल श्रेणी में दिखाया गया, योजनाओं के लाभ से वंचित होने का आरोप"
"जाति श्रेणी में गड़बड़ी का आरोप: ST की मनीता देवी को जनरल कोटि में दर्ज किया गया"
कविता देवी ने बताया कि उनके पति लंबे समय से गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। वे न ठीक से बोल पाते हैं और न ही चल-फिर सकते हैं। वहीं उनके बुजुर्ग ससुर भी लंबे समय से बिस्तर पर हैं। ऐसे में पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई है। दिहाड़ी मजदूरी कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करने वाली कविता देवी के लिए सबसे बड़ी चिंता सिर पर सुरक्षित छत की है। उनका आरोप है कि आवास योजना का लाभ पाने के लिए उन्होंने कई बार प्रखंड कार्यालय के चक्कर लगाए, लेकिन अब तक उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गांव के मुखिया द्वारा आवास स्वीकृत कराने के नाम पर 20 हजार रुपये की मांग की गई थी। पैसे नहीं देने पर उन्हें योजना से वंचित कर दिया गया। इतना ही नहीं, जब उन्होंने इस संबंध में सवाल उठाया तो उन्हें डांट-फटकार कर चुप रहने को कहा गया।
नक्षत्र न्यूज़ की टीम जब गांव पहुंची तो पाया कि परिवार बेहद दयनीय परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहा है। मिट्टी के घर की दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं और बरसात के दौरान घर के गिरने का खतरा बना हुआ है। बीमारी, गरीबी और असुरक्षित आवास ने परिवार की स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है। निराश होकर कविता देवी ने पलामू उपायुक्त से मुलाकात कर अपनी समस्या रखी है। उन्होंने मामले की जांच कराने तथा आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की है। अब उनकी उम्मीद जिला प्रशासन पर टिकी हुई है। दस्तावेजों में हेरफेर के आरोप पर कानूनी पहलू यदि किसी सरकारी योजना से जुड़े दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा, गलत प्रविष्टि या रिकॉर्ड में जानबूझकर छेड़छाड़ की जाती है, तो यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 217 के तहत किसी लोक सेवक को उसकी वैध शक्ति का दुरुपयोग कराने के उद्देश्य से झूठी सूचना देना दंडनीय अपराध है। इसमें एक वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
वहीं BNS की धारा 256 के अनुसार यदि कोई लोक सेवक जानबूझकर गलत रिकॉर्ड या दस्तावेज तैयार करता है, जिससे किसी व्यक्ति को अनुचित लाभ पहुंचे या किसी अन्य व्यक्ति अथवा जनता को नुकसान हो, तो उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है। इस अपराध में अधिकतम तीन वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। यदि कविता देवी द्वारा लगाए गए आरोपों में सत्यता पाई जाती है, तो संबंधित दस्तावेजों और प्रक्रिया की जांच के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई संभव हो सकती है। प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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