Pakur: अबुआ आवास की तुलना में 1 शौचालय में तीन गुना खर्च, भारी अनियमितताओं के कारण हाल बेहाल
झारखंड सरकार द्वारा चलाए जा रहे अबुआ आवास योजना में जहां 2 लाख रुपए एक घर के निर्माण के लिए दिए जाते हैं. वहीं बड़तल्ला गांव (पाकुड़) में एक शौचालय के निर्माण के लिए इससे 12 हजार अतिरिक्त खर्च किया जा रहा है, जो सवाल खड़े करता है.

Jharkhand (Pakur): हिरणपुर प्रखंड के बड़तल्ला गांव में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण (SBMG) के तहत दो शौचालय का निर्माण हो रहा है, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता और लागत ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार शौचालय निर्माण में निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है, जिसमें घटिया किस्म की 3 नंबर ईंट, नॉन-ब्रांड टाइल्स और पतली टिन की चादर शामिल हैं.
नियमों का नहीं हो रहा पालन
शौचालय निर्माण में कोई सूचना पट्ट (नोटिस बोर्ड) भी नहीं लगाया गया है, जो नियमों के अनुसार अनिवार्य है. आश्चर्यजनक बात यह है कि एक शौचालय का अनुमानित खर्च लगभग 6 लाख रुपए बताया जा रहा है, जबकि इसमें प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता और आकार देखते हुए यह लागत अत्यधिक प्रतीत होती है.
शौचालय निर्माण के लिए अलग से 12,000
अबुआ आवास योजना के तहत जहां एक घर के लिए लगभग 2 लाख रुपये मिलते हैं, वहीं शौचालय निर्माण के लिए अलग से 12,000 रुपये की राशि दी जाती है, जिसका मतलब यह नहीं कि शौचालय का खर्च घर से तीन गुना ज्यादा है, बल्कि यह एक अलग मद है. आवास और शौचालय के लिए फंड अलग-अलग आते हैं, और यह आरोप कि शौचालय का खर्च घर से तीन गुना है, वित्तीय प्रबंधन या निर्माण लागत के अंतर से जुड़ा हो सकता है, न कि योजना के नियमों से.
"तीन गुना खर्च" का मतलब
यह आंकड़ा आमतौर पर इस बात पर आधारित होता है कि अगर ₹2 लाख के आवास बजट में शौचालय का हिस्सा निकाला जाए, तो यह राशि ₹12,000 से बहुत कम होगी, जिससे यह भ्रम पैदा होता है कि शौचालय बनवाने में बहुत ज्यादा पैसा लग रहा है या उसका अनुपात बहुत ज़्यादा है, जबकि दोनों अलग-अलग योजनाओं या मदों के तहत आते हैं.
राशि अधिक, गुणवत्ता शून्य
स्थानीय लोग इस बात पर आश्चर्य जताते हैं कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद शौचालय का निर्माण घटिया सामग्री से किया जा रहा है. इससे साफ संकेत मिलता है कि निर्माण प्रक्रिया में भारी भ्रष्टाचार और अनियमितताएं शामिल हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसी तरह की अनियमितताएं जारी रहीं, तो सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं का लाभ गरीब और जरूरतमंद वर्ग तक सही रूप में नहीं पहुंच सकेगा.
रिपोर्ट: नंद किशोर मंडल









