बिहार के 6 सांसद पचा गए सांसद निधि के करोड़ों रुपए ! विपक्ष के सवाल पर JDU- "आपसे पूछ कर नहीं करेंगे खर्च"
18वीं लोकसभा में जीते हुए बिहार के सांसदों को दो बार सांसद निधि से फंड मिल चुके हैं. छह सांसदों की लिस्ट सामने आई है, जिसमें बताया जा रहा है कि इन्होंने एक भी रुपए जनता की भलाई के लिए खर्च नहीं किए हैं. वही जेडीयू से सवाल पूछे जाने पर सांसद की प्रतिक्रिया आती है कि उन्हें किसी से पूछ कर खर्च करने की जरूरत नहीं है.

BIHAR (PATNA): एक तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विकास को लेकर यात्रा पर निकल रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ न तो उनके सांसद और न ही उनके घटक दल के कुछ सांसदों ने अब तक सांसद निधि से एक रुपया भी खर्च नहीं किया है. न ही विकास का कोई कार्य किया है. अब इस पूरे मामले को लेकर विपक्ष के नेता सत्ता पक्ष को घेरने में जुट गए हैं.
6 सांसदों के रिपोर्ट कार्ड में चौंकाने वाली तस्वीर
18वीं लोकसभा चुनाव का दो वित्त वर्ष बीतने वाला है. सांसदों को अपने लोकसभा क्षेत्र में सड़क, स्कूल, अस्पताल और बुनियादी सुविधाओं को ठीक करने के लिए हर सांसद को दो बार 5-5 करोड़ रुपए फंड मिल चुके हैं. लेकिन बिहार के 40 सांसदों में से 6 सांसद के रिपोर्ट कार्ड में चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है.
लालू यादव की बेटी मीसा भारती भी ‘नॉन परफॉर्मर’
जदयू सांसद और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, लालू यादव की बेटी मीसा भारती, बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी की बेटी शांभवी चौधरी, भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी, डॉ संजय जायसवाल और विवेक ठाकुर ऐसे सांसद हैं, जो दो साल में एक पैसा भी खर्च नहीं कर पाए हैं और ना ही विकास की कोई योजना बना पाए हैं. मतलब पूरी तरह ‘नॉन परफॉर्मर’ साबित हुए हैं. बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं. MPLADS (Members of Parliament Local Area Development Scheme) के तहत हर सांसद को हर साल अपने क्षेत्र में विकास कराने के लिए 5 करोड़ रुपए मिलते हैं. इस तरह 5 साल के कार्यकाल के दौरान एक सांसद को कुल 25 करोड़ रुपए मिलते हैं. लेकिन 6 सांसदों ने इसे खर्च नहीं किया है.
सांसदों की लापरवाही या विकास कार्यों में रुचि न होना: कांग्रेस
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व एमएलसी प्रेमचंद्र मिश्रा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह अपने आप में चिंता का विषय है. चुने हुए प्रतिनिधि, जिनको विकास मद के लिए ऐच्छिक कोष के तहत सालाना पैसा मिलता है. वे जनप्रतिनिधि छोटे-मोटे विकास कार्य में खर्च करते हैं. लेकिन यह जो रिपोर्ट है कि छह-छह सांसदों ने एक रुपया भी खर्च नहीं किया, कहीं न कहीं यह उन सांसदों की लापरवाही कही जा सकती है. या विकास कार्यों में रुचि न होना. उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि इन सांसदों को तत्काल अपने पैसे निकालने चाहिए और विकास मद में खर्च करना चाहिए. जिसके लिए उनको आवंटन किया गया है. ऐसे मामले में किसी भी स्तर पर कोताही नहीं बरती जानी चाहिए.
अपने विवेक से करेंगे खर्च, आपसे पूछ कर नहीं: JDU
वहीं इस मामले पर जदयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने कहा कि सांसदों को अपने क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए जो सांसद निधि मिलती है, उनको पांच वर्षों में खर्च करना पड़ता है. हर सांसद अपने विवेक से अपने क्षेत्र की जरूरत के हिसाब से उसे खर्च करते हैं. लेकिन विपक्ष के साथी हाय-तौबा मचा रहे हैं कि कुछ सांसदों की निधि पूर्णतः खर्च नहीं हुई है. अभिषेक झा ने विपक्ष को जवाब देते हुए कहा कि पांच वर्षों के लिए सांसद बनते हैं. किस वर्ष में, कहां खर्च करेंगे अपने विवेक से करेंगे. आपसे पूछ कर नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि हमने तो वह शासन देखा है जहां जब इनके लोगों को फंड मिलता है तो इनके मन में पहला भाव क्षेत्र का विकास नहीं, बल्कि कैसे गबन करना है, घोटाला करना है, यह भाव आता है. तो जनता ऐसे भाव के लोगों को भाव नहीं देती है.
‘मैं सभी पंचायत में पैसे देता हूं इसीलिए...’: संजय जायसवाल
वहीं भाजपा के सांसद संजय जायसवाल द्वारा राशि खर्च नहीं करने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि मैं सभी पंचायत में पैसे देता हूं इसीलिए मुझे सांसद निधि को रिलीज करने में समय लग रहा है.
हमने तो खर्च किया है और हम विकास करना चाहते हैं: सुधाकर सिंह
बिहार में सांसद निधि का सबसे ज्यादा पैसा खर्च करने वाले राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि हमने तो खर्च किया है और हम विकास करना चाहते हैं. जनता की जो मांग है हम उसके अनुसार खर्च कर रहे हैं. उन्होंने राशि खर्च नहीं करने वाले सांसदों को नसीहत दी कि अगर सरकार आपको विकास करने के लिए पैसा देती है. तो आप भी लिखिए और आप भी खर्च कीजिए.
लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास की सांसद शांभवी चौधरी ने भी विकास निधि खर्च नहीं किया है. जब इस मामले में लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान से पूछा गया तो वह हड़बड़ा गए लेकिन उन्होंने कहा कि वे इसे लेकर अपने सांसद से पूछेंगे.
भाजपा को पूरे मामले पर बोलना चाहिए: RJD
इस पूरे मामले पर राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता एजाज अहमद ने सत्ता पक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि समझ लीजिए बिहार में स्थिति क्या है. सत्ता पक्ष के सांसद ही विकास नहीं कर रहे हैं और अब इससे ज्यादा क्या कहा सकता है. भाजपा को पूरे मामले पर बोलना चाहिए.
सत्ता पक्ष का दावा है कि नीतीश कुमार पिछले 20 साल से विकास के कार्यों में लगे हैं. लेकिन सत्ता पक्ष के ही सांसद अभी भी विकास कार्यों से पीछे हैं. अपने सांसद निधि का ₹1 भी खर्च नहीं किया है. वहीं इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल के सुधाकर सिंह सबसे आगे हैं. अब सवाल यह है कि विकास की नैय्या में नीतीश कुमार के सांसद कहां हैं ?
रिपोर्ट : मरगूब आलम









