काड़ा लड़ाई में बिफरे भैंसे ने ली पिता की जान, बेटा गंभीर रूप से जख्मी, मातम में बदला मकर संक्रांति का उत्साह
दो ताकतवर भैंसों की भिड़ंत के दौरान एक उग्र भैंसा अनियंत्रित होकर दर्शक दीर्घा की ओर दौड़ पड़ा. भागने की आपाधापी में भैंसे ने सुभाष कर्मकार को सींगों पर उठाकर जमीन पर पटक दिया. वहीं, पुत्र सागर कर्मकार को बुरी तरह...

JHARKHAND (JAMSHEDPUR): पूर्वी सिंहभूम जिले के बोड़ाम थाना क्षेत्र की बेलडीह पंचायत के जोबा गांव में मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में आयोजित काड़ा (भैंसा) लड़ाई प्रतियोगिता त्रासदी में बदल गई. मैदान में दो ताकतवर भैंसों की भिड़ंत के दौरान एक उग्र भैंसा अनियंत्रित होकर दर्शक दीर्घा की ओर दौड़ पड़ा. भागने की आपाधापी में भैंसे ने सुभाष कर्मकार को सींगों पर उठाकर जमीन पर पटक दिया. वहीं, पुत्र सागर कर्मकार को बुरी तरह रौंद दिया. आनन-फानन में स्थानीय लोगों की मदद से खून से लथपथ पिता सुभाष कर्मकार और बेटे सागर कर्मकार को एमजीएम अस्पताल ले जाया गया. जहां चिकित्सकों ने पिता को मृत घोषित कर दिया. वहीं, इस घटना में उनके जख्मी पुत्र सागर के पैर की हड्डी टूट गई है और वह गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है. त्योहार के दिन हुई इस घटना से कर्मकार परिवार में कोहराम मच गया है.
हादसे के बाद भी जारी रहा खेल
इस पूरे आयोजन के दौरान आयोजकों का मानवता को शर्मसार करने वाला चेहरा सामने आया. इतना बड़ा हादसा होने के बावजूद आयोजकों ने खेल नहीं रोका और दो और जोड़ों की लड़ाई करवाई. बाद में घटना की सूचना पा कर बोड़ाम पुलिस दलबल के साथ मौके पर पहुंची और सख्ती दिखाते हुए मेला बंद करवाया. पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंपा.
कानूनी प्रतिबंध के बावजूद ग्रामीण इलाकों में आयोजन
बता दें कि इस तरह के हिंसक खेलों पर कानूनी रूप से रोक है, बावजूद इसके ग्रामीण इलाकों में ऐसे खेलों का आयोजन किया जाता है, जो जिंदगी पर भारी पड़ता साबित हो रहा है.
रिपोर्ट : बिनोद केसरी









