Chatra Air Ambulance Crash: सामने आई पहली जांच रिपोर्ट, लापरवाही या तकनीकी खराबी !
चतरा विमान हादसे की जांच में ब्लैक बॉक्स अनुपस्थित पाया गया. वहीं बताया जा रहा है कि अब तक पीड़ित परिवारों को मुआवजे का भुगतान नहीं किया गया है.

Jharkhand (Chatra): 23 फरवरी को चतरा में हुए एयर एम्बुलेंस हादसे की जांच मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार (AAIB) ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी, लेकिन अब पता चला है कि विमान में ब्लैक बॉक्स था ही नहीं.
वहीं, सरकार द्वारा किए गए मुआवजे के वादे अब भी कागजों तक ही सीमित हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, खराब मौसम के बावजूद उड़ान भरने वाला यह विमान कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (CVR) और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) से लैस नहीं था, जिससे हादसे की सटीक वजह जानना मुश्किल हो गया है.
हैरानी की बात यह है कि हादसे के बाद मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने का भरोसा दिया था, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी एक रुपया नहीं मिला है.
मृतक डॉक्टर विकास गुप्ता के परिजनों ने 5 करोड़ रुपये और शिक्षा की जिम्मेदारी की मांग की है. अन्य पीड़ित परिवार भी सहायता की बाट जोह रहे हैं, पर प्रशासन की चुप्पी ने उनके जख्मों को और गहरा कर दिया है.
एयर एंबुलेंस में सीवीआर और एफडीआर नहीं
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त एयर एंबुलेंस में सीवीआर और एफडीआर दोनों मौजूद नहीं थे. यह विमान एक छोटा टर्बोप्रॉप एयरक्राफ्ट था, जिसमें कई मामलों में ब्लैक बॉक्स अनिवार्य नहीं होता. रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा नियमों के तहत छूट मिली हुई थी लेकिन सवाल उठता है-क्या ऐसे विमानों में भी अब इसे अनिवार्य किया जाना चाहिए?
दुर्घटना के समय ईएलटी सक्रिय नहीं हुआ
जांच में यह भी सामने आया है कि विमान का इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर (ईएलटी) दुर्घटना के समय सक्रिय नहीं हुआ. इस हादसे में कुल सात लोगों की मौत हुई थी, जिनमें एक मरीज और उसके दो अटेंडेंट भी शामिल थे. इस वजह से दुर्घटनास्थल का पता लगाने में देरी हुई और प्रशासन को स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के आधार पर मलबे तक पहुंचना पड़ा.
23 मिनट बाद एयर एंबुलेंस रडार से भी गायब
एयर एंबुलेंस ने 23 फरवरी की शाम को रांची से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी. लेकिन उड़ान भरने के करीब 23 मिनट बाद उसका संपर्क एयर ट्रैफिक कंट्रोल से टूट गया. क्रू की आखिरी बातचीत में कोलकाता एटीसी से फ्लाइट लेवल 140 पर जाने की अनुमति मांगी गई थी, जिसके बाद कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद विमान रडार से भी गायब हो गया.
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