30 KM घिसटकर दफ्तर पहुंचता है 80% दिव्यांग, अधिकारी घुमाते रहते हैं इस डेस्क से उस डेस्क
गोड्डा के रहने वाले अमित को प्रखंड कार्यालय द्वारा इलेक्ट्रॉनिक व्हीलचेयर मुहैया नहीं कराई जा रही है, कई बार 30-30 किलोमीटर उन्हें दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. साथ ही उन्हें मिलने वाला दिव्यांग पेंशन भी बीते 6 महीनों से नहीं मिल रहा.

Jharkhand (Godda): गोड्डा सदर प्रखंड के झिलवा पंचायत स्थित दामा गांव के रहने वाले अमित कुमार मंडल, जो शरीर से दिव्यांग हैं, प्रखंड कार्यालय के कई चक्कर लगा चुके हैं, बावजूद इसके उन्हें प्रखंड कार्यालय द्वारा साइकिल मुहैया नहीं कराई जा रही. इलेक्ट्रॉनिक व्हीलचेयर की मांग को लेकर वे कई दफा कार्यालय के चक्कर लगा चुके हैं. उन्होंने बताया कि जितनी बार भी विभागीय कर्मचारियों के पास वे गए, उन्हें बहाना बनाकर भेज दिया गया.
अमित कुमार मंडल की जुबानी -
"साहब... मैं 80 फीसदी दिव्यांग हूं, मुझे बैटरी से चलने वाली ट्राई साइकिल चाहिए. लेकिन कोई मेरी मदद नहीं कर रहा है. मैं तीन हफ्तों से 30 किलोमीटर की दूरी तय कर आता हूं, लेकिन हर बार विभाग के कर्मचारी मुझे बहाने बनाकर भेज देते हैं."

80 फीसदी दिव्यांगता का शिकार है अमित
अमित ने बताया कि वो झिलवा पंचायत के दामा गांव का रहने वाला है. पिछले एक महीने से अब तक तीन बार विभाग के चक्कर लगा चुका है, लेकिन अधिकारी उसकी बातों पर या स्थिति पर जरा भी ध्यान नहीं देते. अमित का शरीर 80 फीसदी दिव्यांग अवस्था का शिकार है. वे कहते हैं कि "हर बार उम्मीद लगाकर आता हूं, और यहां से निराश ही वापस लौटना पड़ता है".
6 महीनों से बंद है दिव्यांग पेंशन
भले शरीर साथ नहीं देता लेकिन हौसला इतना कि अपनी जायज मांग के लिए तीन बार प्रखंड कार्यालय की चौखट लांघ चुके हैं. अमित की मांग बस इतनी सी है कि उन्हें सरकार इलेक्ट्रॉनिक व्हीलचेयर दिला दे ताकि उन्हें किसी और के कंधे का बोझ न बनना पड़े. सिर्फ इतना ही नहीं अमित दिव्यांग पेंशन मिला करता था, जिसके सहारे वह अपनी जिंदगी बसर किया करते थे, वह पेंशन भी बीते 6 महीनों से उन्हें नहीं मिल रही है.
अधिकारी क्यों नहीं निभा रहे जिम्मेवारी!
नक्षत्र न्यूज से बातचीत के दौरान अमित के जरिए सरकारी दावों की पोल खुलती तो नजर आई ही है. साथ ही इसके साथ यह सवाल भी उठते हैं कि क्यों एक ऐसे व्यक्ति को उसका हक नहीं दिया जा रहा, जो उसका हकदार है और यह सरकार की भी जिम्मेवारी है कि ऐसे व्यक्ति को सशक्त बनाने में उसका सहयोग करे.
रिपोर्ट: प्रिंस यादव









