"क्या सरकार की शिकायतें सुनेंगे अधिकारी", जनता दरबार पर जारी नए आदेश को विपक्ष ने बताया नौटंकी
नीतीश कुमार ने सख्त आदेश दिया है कि अब अधिकारी पंचायत स्तर से लेकर सचिवालय स्तर तक सोमवार को जनता दरबार लगाएंगे और लोगों की शिकायत दूर करेंगे. मुख्यमंत्री द्वारा जारी इस नये फरमान को लेकर प्रदेश में सियासत शुरू हो गई है.

BIHAR (PATNA): क्या बिहार में सुशासन का चेहरा बदल गया है? दरअसल नई सरकार में सुशासन लागू करने की बड़ी पहल की जा रही है. पहले जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हर सोमवार को जनता दरबार लगाते थे और वहां पूरे बिहार से लोग आते थे. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जनता दरबार में ऑन स्पॉट लोगों की समस्याएं सुनते थे और उनका निराकरण करते थे. अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई जाती थी. यहां तक की मंत्रियों की भी क्लास लगाई जाती थी. वहीं अब नीतीश कुमार ने सख्त आदेश दिया है कि अब अधिकारी पंचायत स्तर से लेकर सचिवालय स्तर तक सोमवार को जनता दरबार लगाएंगे और लोगों की शिकायत दूर करेंगे.
19 जनवरी से अधिकारी सुनेंगे जनता की बात
जानकारी हो कि आगामी 19 जनवरी से राज्य की जनता का अधिकारियों से सीधे आमना-सामना होगा. 19 जनवरी से अब पंचायत स्तर से लेकर जिला स्तर तक सरकारी कार्यालयों में अधिकारी हर सोमवार और शुक्रवार को आम लोगों की शिकायत सुनेंगे और जनता की समस्याओं का समाधान करेंगे. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा जारी यह निर्देश बुधवार को सोशल मीडिया पर डाला गया था और अब इसे लेकर डेट फिक्स कर दिया गया है. इसे अनिवार्य तौर पर करने का निर्देश दिया गया है.

‘जब तक सरकार की इच्छा शक्ति बेहतर नहीं होगी, अधिकारी सुनते रहेंगे फरमान’
मुख्यमंत्री द्वारा जारी इस नये फरमान को लेकर प्रदेश में सियासत शुरू हो गई है. पूरे मामले पर राष्ट्रीय जनता दल का कहना है कि सरकार 20 साल से है, लेकिन जनता की समस्या जैसे थी वैसे ही है. आप पहले खुद जनता दरबार लगाते थे, अब अधिकारी लगाएंगे. इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है. पार्टी के प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि अधिकारियों में कार्य करने की इच्छा शक्ति समाप्त हो चुकी है. कहीं न कहीं उन्हें भी समझ में आ गया है कि सरकार में बैठे नेता जनता के हितों के लिए, जनता के मुद्दों पर काम नहीं करते हैं, बल्कि सिर्फ बयानबाजी करते हैं. जब तक सरकार की इच्छा शक्ति बेहतर नहीं होगी, जब तक सरकार में काम करने की क्षमता नहीं दिखेगी, तब तक अधिकारी भी फरमान पर फरमान सुनते रहेंगे, लेकिन वह उन्हें परवान नहीं चढ़ाएंगे. आखिर क्या कारण है कि बिहार में भ्रष्टाचार को सदाचार और शिष्टाचार का रूप दे दिया गया है. हर दिन उपमुख्यमंत्री, सीओ, डीसीएलआर पदाधिकारियों के साथ बैठक करते हैं. फरमान पर फरमान जारी करते हैं, लेकिन होता उसका उल्टा है.
‘क्या सरकार की शिकायतें सुनेंगे अधिकारी ?’
कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरा है. पार्टी के प्रवक्ता असीत नाथ तिवारी ने इसे नौटंकी बताते हुए सवाल उठाया कि यह कैसा सुशासन है. उन्होंने कहा कि आम आदमी की तमाम शिकायतें तो सरकार से ही है, तो क्या सरकार की शिकायतें अधिकारी सुनेंगे. और अगर सुन भी लेंगे तो इस सरकार का कर क्या लेंगे. ये एक ड्रामा है. इस राज्य में कुछ नहीं हो रहा है. चप्पे-चप्पे पर भ्रष्टाचार है और भ्रष्टाचार के पैसे से नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार लाल हो रहे हैं.
‘यह फैसला उन लोगों को करारा जवाब है, जो सिर्फ आरोप लगाते हैं समाधान नहीं देते’
इस पूरे मामले पर भाजपा का कहना है कि यही तो सुशासन है कि अब अधिकारी सीधे तौर पर जनता से मिलेंगे. उनकी शिकायत सुनेंगे और उनका निराकरण कर देंगे. पार्टी के प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने कहा कि यह सरकार सिर्फ आदेश देने वाली नहीं, जमीन पर जवाबदेही तय करने वाली सरकार है. अब अफसर एसी कमरे में नहीं बैठेंगे. बल्कि पंचायत से लेकर जिला मुख्यालय तक जनता के सामने जवाब देंगे. मुख्यमंत्री जी खुद इसकी मॉनिटरिंग करेंगे. इसीलिए इसमें लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है. यह फैसला उन लोगों को करारा जवाब है, जो सिर्फ आरोप लगाते हैं लेकिन जनता को समाधान नहीं देते.
‘नीतीश कुमार ने शुरू से ही सुशासन को सबसे आगे रखा है’
जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नीतीश कुमार ने शुरू से ही सुशासन को सबसे आगे रखा है और यही कारण है कि अब पंचायत से लेकर जिला स्तर तक के लोगों को यहां शिकायत का निपटारा मिलेगा और अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा जाएगा.
बहरहाल देखना है नीतीश कुमार के सुशासन के बदलते चेहरे से जनता को कितना फायदा होता है?









