गया जदयू में बढ़ी अंदरूनी कलह, प्रदेश सचिव ने पद और पार्टी की सदस्यता से दिया इस्तीफा
जदयू में गया जिले से राजनीतिक हलचल सामने आई है, प्रदेश सचिव ने पार्टी की सदस्यता से दिया इस्तीफा दे दिया है. बताया जा रहा है कि इस्तीफे का कारण उनके साथ की गई उपेक्षा है. वही इस घटना के बाद पार्टी में गहरा असंतोष है.

BIHAR (GAYA): बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू में गया जिले से बड़ी राजनीतिक हलचल सामने आई है. पार्टी के जदयू प्रदेश सचिव डॉ चंदन कुमार यादव ने अपने पद के साथ-साथ जदयू की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफे से पार्टी के अंदर गहरा असंतोष और संगठनात्मक दरार खुलकर सामने आ गया है.
‘नीतीशवादी कार्यकर्ताओं की लगातार हो रही उपेक्षा’
प्रदेश सचिव ने अपने त्यागपत्र में पार्टी संगठन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा है कि जदयू में अब संगठनात्मक लोकतंत्र समाप्त हो चुका है और वर्षों से पार्टी को सींचने वाले समर्पित नीतीशवादी कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है. उनके अनुसार, पार्टी में कुछ मुट्ठी भर स्वयंभू नेता अपने करीबी लोगों को संगठन और सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर स्थापित कर रहे हैं, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है.
‘जान-माल की परवाह किए बिना पार्टी को किया मजबूत’
उन्होंने कहा कि वे पिछले 20-25 वर्षों से छात्र जीवन के समय से ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जनता दल यूनाइटेड के लिए निरंतर कार्य करते आ रहे हैं. उस दौर में भी उन्होंने पार्टी का प्रचार-प्रसार किया, जब गया जिले में राजद के बाहुबली नेताओं का दबदबा था और कार्यकर्ता खुलकर राजनीति करने से डरते थे. उन्होंने अपने जान-माल की परवाह किए बिना पार्टी को मजबूत करने का कार्य किया.
‘कुछ तथाकथित मठाधीशों का है दबदबा’
प्रदेश सचिव ने यह भी आरोप लगाया कि आज पार्टी की स्थिति यह हो गई है कि पार्टी मुख्यालय में बैठे कुछ तथाकथित मठाधीशों की परिक्रमा किए बिना न तो संगठनात्मक दायित्व मिलता है और न ही मुख्यमंत्री से मुलाकात संभव है. ऐसे में नीतीशवादी विचारधारा के समर्पित कार्यकर्ताओं के लिए पार्टी में कोई स्थान नहीं बचा है.
‘पार्टी और नेता के हित में उठाया कदम’
इस्तीफे के संबंध में उन्होंने कहा कि यह त्याग किसी व्यक्तिगत नाराजगी के कारण नहीं, बल्कि पार्टी और नेता के हित में किया गया है, ताकि उनके पद पर ऐसे लोगों को मौका दिया जा सके जो नेतृत्व की अपेक्षाओं पर खरे उतरते हों. उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपना राजनीतिक आदर्श बताते हुए कहा कि वे हमेशा उनके शुभचिंतक रहेंगे.
‘समर्पित कार्यकर्ताओं को हक नहीं दिला पाने का दुख’
अंत में उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस बात का गहरा दुख रहेगा कि वे अपने जैसे लाखों पुराने और समर्पित नीतीशवादी कार्यकर्ताओं को उनका हक नहीं दिला सके. पार्टी नेतृत्व से उन्होंने सहानुभूतिपूर्वक उनके इस्तीफे को स्वीकार करने की अपील की है.









