हस्ताक्षर तो कराए, लेकिन जानकारी नहीं दी'! 15वीं वित्त की राशि पर बड़ा खेल?
मेहरमा प्रखंड की सिमानपुर पंचायत में 15वीं वित्त आयोग की राशि से जुड़े ₹49 हजार के भुगतान पर विवाद खड़ा हो गया है। लाभुक समिति और मुखिया ने दावा किया है कि उनकी जानकारी के बिना भुगतान किया गया। मामले की जांच की मांग की गई है।


गोड्डा: झारखंड के गोड्डा जिले में 15वीं वित्त आयोग की राशि के इस्तेमाल को लेकर एक विवाद खड़ा हो गया है। मेहरमा प्रखंड की सिमानपुर पंचायत में पेयजल मरम्मत के लिए दो योजनाओं के तहत लगभग ₹49 हजार के भुगतान पर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि लाभुक समिति की जानकारी और सहमति के बिना यह राशि सीधे वेंडर के खाते में ट्रांसफर कर दी गई। इस मामले में पंचायत की मुखिया ने भी यह दावा किया है कि उनसे केवल हस्ताक्षर कराए गए, लेकिन पूरी प्रक्रिया के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई।
लाभुक समिति ने भुगतान प्रक्रिया पर उठाए सवाल
लाभुक समिति के अध्यक्ष कार्तिक यादव और पंचायत सहायक बमबम दास ने आरोप लगाया है कि पेयजल मरम्मत की दोनों योजनाओं में लगभग ₹49 हजार का भुगतान उनकी जानकारी के बिना कर दिया गया। उनका कहना है कि न तो समिति की अनुमति ली गई और न ही भुगतान से पहले उन्हें कोई सूचना दी गई। कार्तिक यादव ने बताया कि पहले उन्हें करीब ₹17 हजार की निकासी की जानकारी मिली, और अगले ही दिन उन्हें पूरी योजना की राशि निकलने का पता चला। इसके बाद, उन्होंने मेहरमा प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को एक लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

मुखिया बोलीं- हस्ताक्षर कराए गए, लेकिन जानकारी नहीं दी गई
पंचायत की मुखिया फुदीया देवी ने भुगतान प्रक्रिया को लेकर कुछ गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर तो कराए गए, लेकिन उन्हें यह नहीं बताया गया कि किस मद में भुगतान किया जा रहा है और पूरी प्रक्रिया क्या है। मुखिया के इस बयान के बाद यह सवाल उठता है कि अगर लाभुक समिति और मुखिया दोनों ही भुगतान प्रक्रिया के बारे में अनजान थे, तो फिर यह राशि किस आधार पर जारी की गई?
पंचायत सचिव पर आरोप, जांच की मांग
इस मामले में पंचायत सचिव जनार्दन कुमार पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके। हालांकि, पंचायत सचिव या संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऐसे में इन आरोपों की सच्चाई का पता जांच के बाद ही चलेगा। अब सभी की नजर प्रशासन की जांच पर है कि आखिर 15वीं वित्त आयोग की राशि के भुगतान में नियमों का पालन हुआ या नहीं।

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