अफसरों की अलमारी में बंद बेरोजगारों की फाइलें! 'आय वृद्धि योजना' पर PIL, हाईकोर्ट ने सरकार को दिया 4 हफ्ते का टाइम
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि वर्ष 2023 और 2024 में आय वृद्धि योजना के लिए जो सरकारी फंड जारी हुआ था, वह बिना एक भी रुपया खर्च किए ही सरकार को वापस (लैप्स) चला गया, लेकिन बेरोजगारों तक मदद नहीं पहुंची।

RANCHI/JHARKHAND: झारखंड में बेरोजगार युवाओं की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की गई 'आय वृद्धि योजना' के क्रियान्वयन पर झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) ने सख्त रुख अपनाया है। योजना का लाभ शत-प्रतिशत बेरोजगारों तक न पहुंचने के खिलाफ दाखिल एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार को कड़ा निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि आखिर बेरोजगारों के लिए शुरू की गई यह योजना सुचारू रूप से क्यों नहीं चल रही है? अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। इस याचिका पर अब अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को होगी।
2023 से बिना खर्च हुए वापस लौट रहा है फंड!
अदालत में प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अपराजिता भारद्वाज और अधिवक्ता आकाश अजीत कुमार ने पक्ष रखा। उन्होंने सुनवाई के दौरान बेहद चौंकाने वाली जानकारी सामने रखी। अधिवक्ताओं ने बताया कि वर्ष 2023 के बाद से रांची के बेरोजगारों को इस योजना का कोई लाभ नहीं मिल पाया है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि वर्ष 2023 और 2024 में आय वृद्धि योजना के लिए जो सरकारी फंड जारी हुआ था, वह बिना एक भी रुपया खर्च किए ही सरकार को वापस (लैप्स) चला गया, लेकिन बेरोजगारों तक मदद नहीं पहुंची।
RTI से खुला 'फाइलों के अटकने' का खेल
जब योजना का लाभ न मिलने पर लाभुकों ने इस संबंध में सूचना का अधिकार (RTI) दाखिल किया, तो सरकारी सिस्टम की लापरवाही खुलकर सामने आ गई। RTI से पता चला कि जिला कल्याण पदाधिकारियों (District Welfare Officers) ने लाभुकों (Beneficiaries) की सूची को वेरीफाई करके आगे की मंजूरी के लिए उच्च अधिकारियों (Higher Authority) के पास भेज दिया है। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी फाइनल लिस्ट वहां से मंजूर होकर वापस नीचे आई ही नहीं है।
2015 से चल रही है योजना, फिर भी 100% फायदा नहीं!
प्रार्थी की मांग है कि रांची जिले के बेरोजगारों को इस योजना का पूरा-पूरा लाभ दिलाया जाए। गौरतलब है कि यह 'आय वृद्धि योजना' वर्ष 2015 में शुरू की गई थी, लेकिन सालों बीत जाने के बाद भी इसे अब तक शत-प्रतिशत लागू नहीं किया जा सका है। अब देखना होगा कि 4 हफ्ते बाद सरकार हाईकोर्ट में इस लापरवाही पर क्या सफाई पेश करती है।
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