इंस्टाग्राम पर कॉकरोच जनता पार्टी ने BJP को पछाड़ा, 4 दिनों में 9.3 लाख के पार पहुंचे फॉलोअर्स, जानें कौन है इसके संस्थापक
इंस्टाग्राम में 16 मई से कॉकरोच जनता पार्टी नाम का एक अकाउंट वायरल हो रहा है जिसके अबतक 9.3 मीलियन फॉलोअर्स हो गए हैं. फॉलोअर्स के मामले में CJP ने बीजेपी के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंड को भी पीछे छोड़ दिया है.

Cockroach Janta Party surpasses BJP on Instagram: भारत की राजनीति और सोशल मीडिया जगत में पिछले कुछ दिनों अचानक एक नया नाम तेजी से वायरल हो रहा है. इतना ही नहीं इस नाम ने देश की राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा कर रख दी है. यह नाम है CJP यानी 'कॉकरोच जनता पार्टी'. बता दें, यह पार्टी देश के युवाओं और बेरोजगारी के मुद्दों पर फोकस करने वाला एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है.
दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम में 16 मई से कॉकरोच जनता पार्टी नाम का एक अकाउंट वायरल हो रहा है जिसके अबतक 9.3 मीलियन फॉलोअर्स हो गए हैं. फॉलोअर्स के मामले में CJP ने बीजेपी के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंड को भी पीछे छोड़ दिया है. इंस्टा पर यह अकाउंट @cockroachjantaparty से चल रहा है और इस अकाउंट ने महज 4 दिनों के भीतर ही 20 मई तक 93 लाख फॉलोअर्स यानी कि 9.3 मिलियन आंकड़ा पार कर लिया. जबकि बीजेपी पार्टी आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट @bjp4india के लगभग 8.7 मिलियन फॉलोअर्स हैं. हालांकि, सोशल मीडिया पर अभी भी कांग्रेस सबसे आगे नजर आ रही है, इसके इंस्टा अकाउंट @incindia पर करीब 13.2 मिलियन फॉलोअर्स हैं. वहीं, AAP (आम आदमी पार्टी) के इंस्टाग्राम हैंडल पर 1.9 मिलियन फॉलोअर्स हैं.
बता दें, यह अभियान 16 मई को अचानक सामने आया. बताया जा रहा है कि यह एक व्यंग्यात्मक आंदोलन है जिसे युवाओं द्वारा चलाया जा रहा है. इस अभियान के शुरू होने के पीछे की वजह काफी दिलचस्प हैं. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की एक सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की कथित टिप्पणी के बाद हुई. जिसमें उन्होंने युवाओं और कॉकरोच को लेकर बयान दिए थे. प्रारंभिक में इस अभियान की शुरुआत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मजाकिया अंदाज में शुरू हुआ. लेकिन यह देखते ही देखते युवाओं के बीच काफी वायरल हो गया. इसके बाद अगले ही दिन CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) का इंस्टाग्राम अकाउंट लॉन्च किया गया और जिसके बाद लोकप्रियता तेजी से आगे बढ़ी.
युवाओं द्वारा बनाया गया राजनीतिक मंच है CJP !
यह प्लेटफॉर्म खुद को युवाओं का, युवाओं के लिए और युवाओं द्वारा बनाया गया 'राजनीतिक मंच’ बताता है. यह मंच मुख्य रुप से बेरोजगारी, राजनीतिक जवाबदेही, परीक्षा पेपर लीक और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित हैं. यही कारण है कि यह अभियान बड़ी संख्या में युवा, सोशल मीडिया यूजर्स को अपनी तरफ खींचने में सफल रहा. आप इस इंस्टाग्राम अकाउंट की लोकप्रियता का अंदाजा भी इसी बात से लगा सकते हैं कि अकाउंट के लॉन्च के मात्र 78 घंटे में ही 30 लाख फॉलोअर्स हो गए. और इसके बाद तेजी से फॉलोअर्स बढ़ती गई. इतना ही नहीं सिर्फ 4 दिनों में 90 लाख के पार पहुंच गई. सबसे खास बात इस अकाउंट में अबतक केवल 56 पोस्ट ही साझा किए गए हैं.
'बीजेपी की संगठनात्मक ताकत पर भी कटाक्ष'
तेजी से बढ़ती अपनी लोकप्रियता के साथ इस अभियान ने कई पुराने और पहले से स्थापित राजनीतिक संगठनों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चुनौती दी है. बीजेपी को फॉलोअर्स में पछाड़ने के बाद सीजेपी ने तंज भरे कई पोस्ट किए हैं जिसमें लिखा गया है- युवाओं की ताकत को कम मत आंकिए. इसके अलावा दूसरे पोस्ट में अभियान ने ‘वर्ड लार्जेस्ट पार्टी दे सेड’ लिखकर बीजेपी की संगठनात्मक ताकत पर भी कटाक्ष किया है. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह ट्रेंड युवाओं के भीतर बढ़ती नाराजगी और सोशल मीडिया आधारित राजनीतिक अभिव्यक्ति का संकेत हो सकता है.
क्या है 'कॉकरोच जनता पार्टी'
CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी की वेबसाइट पर इसके संस्थापक सह संयोजक का नाम अभिजीत दीपके बताया गया है. अभिजीत से जब यह पूछा गया कि उन्हें इस तरह के सोशल मीडिया कैंपेन का आइडिया कहां से आया ? इसके जवाब में उन्होंने बताया कि ''एक्स (ट्विटर) पर वे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का बयान देख रहे थे जिसमें वे सिस्टम की अलोचना करने और राय देने के लिए देश की युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवियों से कर रहे थे." उनके बयान को 'मैंने बेहत हस्यास्पद समझा. क्योंकि देश के संविधान का रक्षक सीजेआई को माना जाता है. वो संविधान जो देश के हर व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आजादी देता है. लेकिन अब एक ऐसा शख्स जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए है, वो युवाओं की तुलना कैसे कॉकरोच और परजीवियों से कर सकता है.'
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस के बयान पर राय देकर सवाल पूछा- अभिजीत
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के बयानों से मुझे गुस्से और निराशा से भर दिया. जिसके बाद इसपर मैंने एक्स पर अपनी राय दी और पूछा कि ''अगर सब कॉकरोच एक साथ आ जाए तो क्या होगा. इसके बाद जेन Z और 25 साल तक के युवाओं के जबरदस्त जवाब मिले. और उन्होंने कहा कि हमें एक साथ आना चाहिए और इसके लिए एक प्लेटफॉर्म बनाया चाहिए.'' मुझे इसने आइडिया दिया कि हमें ऑनलाइन एक पैरोडी पार्टी बनानी चाहिए, जिसका नाम कॉकरोच जनता पार्टी हो. अगर हमें आप कॉकरोच कह रहे हैं तो ठीक है, हम कॉकरोच जनता पार्टी बनाते हैं. इसके बाद इस पार्टी में शामिल होने के लिए पात्रता तय की गई, जैसे- आपको आलसी होना होगा, जैसा सीजेआई ने कहा, आपको बेरोजगार होना होगा और आप लगातार ऑनलाइन रहने वाले हों जैसा सीजेआई ने कहा था."
युवाओं को बेइज्जत करने के लिए सीजेआई जिन भी शब्दों का इस्तेमाल किया, हमने उन्हें इस पार्टी का सदस्य बनने के लिए पात्रता रखा है. कुछ ही घंटों में इसने चमत्कार कर दिया और हर कोई इस पर प्रतिक्रिया देने लगा और खुद को रजिस्टर्ड करने लगा." "इसके बाद हमें लगने लगा कि ये बड़ा होने वाला है और सिर्फ मजाक नहीं रह गया है क्योंकि लोग निराश हो चुके थे और हमने एक वेबसाइट बनाई, पार्टी का घोषणापत्र बनाया. इंस्टाग्राम पर हमारे दो मिलियन फॉलोअर्स (अब चार मिलियन से अधिक) हो चुके हैं और दो लाख से ज्यादा लोगों ने खुद को कॉकरोच जनता पार्टी के सदस्य के तौर पर रजिस्टर किया है. भारतीय राजनीति में ये काफी समय के बाद अभूतपूर्व है."
जानें कौन है CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ?
अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) के निवासी है और वे एख प्रोफेशनल पॉलिटिकल कम्युनिकेशन स्ट्रेटेजिस्ट हैं. पुणे से दीपक ने जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन और इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए उसने अमेरिका का रुख किया. अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस (PR) में अभिजीत ने मास्टर ऑफ साइंस (MS) की डिग्री हासिल की है.
साल 2020 से 2022 के बीच अभिजीत ने AAP (आम आदमी पार्टी) की सोशल मीडिया टीम के साथ भी किया हैं. दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान सोशल मीडिया पर AAP के पक्ष में मीम्स की बाढ़ में उनका अहम योगदान माना जाता है. अभिजीत दिल्ली के शिक्षा विभाग में कम्युनिकेशंस एडवाइजर के रुप में भी काम कर चुके हैं.
CJI सूर्यकांत ने क्या कहा था ?
देश से सर्वोच्चतम न्यायालय यानी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच' से की थी. हालांकि अब कोर्ट की तरफ से एक सफाई दी गई कि जिसमें कहा गया है कि यह टिप्पणी आम बेरोजगार युवाओं के लिए नहीं थी बल्कि फर्जी डिग्री रखने वालों के लिए थी. लेकिन तब तक सोशल मीडिया पर विवाद और आक्रोश भड़क चुका था.
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