MP: एक घर से मिले सैकड़ों की संख्या में कुत्तों के प्राइवेट पार्ट्स, मामले की जांच में जुटी पुलिस
MP के मंडला जिले में कुत्तों के नसबंदी के नाम पर एक बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है जब जंच की गई तो एक कमरे से करीब 800 कुत्तों के प्रजनन अंग बरामद किए गए.

Mandla (Madhya Pradesh): एमपी के मंडला जिले में हैरान कर देने वाला एक मामला सामने आया है. जहां एक घर से कंटेनर में बड़ी संख्या में कुत्तों के रिप्रोडक्टिव ऑर्गन बरामद हुए है. इसे लेकर कई तरह की शंकाएं व्यक्त की जा रही है, दरअसल, मंडला नगर पालिका परिषद द्वारा कुत्तों की नसबंदी को लेकर टेंडर जारी किया गया था जिसके मुताबिक एक नसबंदी के एवज में 679 रुपए की दर निर्धारित की गई थी. जबलपुर की एक प्राइवेट एनजीओ मां अंबे एंटरप्राइजेज ने इस नसबंदी का ठेका लिया था लेकिन इस एनजीओ द्वारा नसबंदी के नाम पर शहर में किसी भी कुत्ते की नसबंदी नहीं की गई. निर्धारित समय में काम शुरू नहीं करने की वजह से इसका टेंडर निरस्त भी कर दिया गया.
इस एनजीओ द्वारा एक शेल्टर होम संचालक निशा ठाकुर जो एक एनिमल एक्टिविस्ट भी है उन्होंने उनके संदिग्ध गतिविधियों के बाद शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने बताया कि एनजीओ को खुद उसने ही अपने शेल्टर होम में एक कमरा उपलब्ध कराया था. कमरा उपलब्ध कराने के बाद भी एजेंसी ने कोई काम नहीं किया. कई दिनों से यह कमरा बंद था. इस पर शेल्टर होम संचालक को कुछ आशंका हुई कि कमरे के अंदर कुत्तों के कुछ अंग रखे हुए हैं. उन्होंने इस बात की शिकायत कलेक्टर, एसपी और नगर पालिका में की.
शिकायत के बाद जिला प्रशासन, पुलिस, पशु चिकित्सालय और नगर पालिका की एक संयुक्त टीम ने जब उस घर में छापेमारी की तो 2 कंटेनर से कुत्तों के 795 अंग प्राप्त हुए. इन अंगों को सड़ने से बचने के लिए फॉर्मलीन नामक केमिकल में डुबोकर रखा गया था. इन अंगों में नर कुत्ते के 518 और मादा कुत्ते के 217 अंग बरामद किए गए. एनुअल एक्टिविस्ट को आशंका थी कि यह अंग कहीं बाहर से लाकर मंडला में इसे दिखाने की योजना तो नहीं थी ताकि कुत्तों के अंग दिखाकर उसके मुताबिक नसबंदी के नाम पर पैसे वसूले जा सकें. लेकिन उनको इसकी भनक लगने की वजह से इसका पर्दाफाश हो गया. वहीं नसबंदी के दौरान कुत्तों के अंग निकालने को लेकर जब पशु चिकित्सक से बात की गई तो उन्होंने बताया कि नसबंदी के दौरान मेल डॉग के टेस्टिस और फीमेल डॉग के ओवर हा यूट्रस निकाला जाता है. फिलहाल उस एनजीओ की इस पूरे मामले को लेकर क्या मंशा थी, यह जांच का विषय है. उन्होंने कहां से यह एनिमल के ऑर्गन्स लाए, इन सब की जांच के लिए नगर पालिका द्वारा कोतवाली थाने में आवेदन दिया गया है. पुलिस अधीक्षक का कहना है कि सभी पक्षों से जानकारी हासिल करने के बाद इसमें वैधानिक कार्यवाही की जाएगी. 
शिकायतकर्ता / एनिमल एक्टिविस्ट निशा सिंह ने बताया कि वो खुद शेल्टर होम चलाती है. जिस संस्था ने यहां नसबंदी के लिए निविदा भरा हुआ था उन्होंने अपनी समस्या बताई थी नगर पालिका द्वारा उनको कोई व्यवस्था नहीं दी जा रही है इसपर उसने खुद उन्हें बगल में रूम अलॉट किया. उन्होंने बताया था कि एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर जो कांजी हाउस में बनाया गया था वहां कोई भी बुनियादी सुविधा नहीं थी. वहां इस संस्था को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था. वह रोज अपनी दवाइयां आदि लाते थे. वहां की खिड़कियां खुली रहती थी. जो डॉग्स को वह रेस्क्यू करके लाते थे वह भाग जाते थे. यह सभी समस्या सुनने के बाद मैंने उनसे कहा कि आपका एक माह का वर्क आर्डर है 10 - 12 दिन, तो आपने ऐसे ही व्यतीत कर दिए हैं, उसके लिए मैं आपको शेल्टर दे रही हूं. आप यहीं से कम करिए जो भी मुझसे मदद होगी मैं करूंगी.
इस दौरान धीरे-धीरे ढाई महीने हो गए. मुझे उनका कोई काम समझ में नहीं आया. इसके बाद मैंने एबीसी सेण्टर के लिए मुख्य नगर पालिका अधिकारी से बात की पर उन्होंने भी संबंध में कोई कार्यवाही नहीं की. इसके बाद मैंने पूरी बात पुलिस अधीक्षक को बताइई और इसकी लिखित कंप्लेंट की. जनसुनवाई में भी मैंने इसकी शिकायत की. मुझे पता चला कि ये लोग कहीं बाहर से एनिमल के किराए से अंग लाकर स्टॉक में रखे हुए हैं और उसको दिखाकर बिल पास करवाते काउंटिंग के आधार पर. 1 अप्रैल को आवेदन देने के बाद में प्रशासन तो पहले आगे पीछे हो रहा था. एक सप्ताह तक मैंने निगरानी किया, कि कहीं वो लोग ताला तोड़ के जो संदिग्ध सामग्री है उसमें हेरा फेरी ना करें. फिर इसके बाद प्रशासन थोड़ा सक्रिय हुआ है और बाद आज (14 अप्रैल 2026) को जप्तिनामा किया गया है. कुत्तों के अंग यहां पर कहां से ले गए हैं क्योंकि इससे नगरपालिका की लापरवाही, गैर जवाबदेही और मानवता की अर्थ उठ चुकी है. जो एनिमल बनाकर कंट्रोल गाइड लाइन है, एनिमल वेलफेयर बोर्ड की गाइड लाइन है उसका इन्होंने मजाक कर रखा है.
वहीं मुख्य नगर पालिका अधिकारी गजेंद्र नाफड़े ने कहा कि जबलपुर से एक एजेंसी है नगर पालिका द्वारा डॉग बाध्यकरण का ऑनलाइन टेंडर निकला था. उस एजेंसी ने इसका टेंडर भरा था. उनका टेंडर सैंक्शन भी हुआ था लेकिन उनके द्वारा कोई काम नहीं किया गया. उनको दो-तीन नोटिस भी दिए गए थे और काम नहीं करने पर बीते 2 अप्रैल को उनका टेंडर निरस्त कर दिया गया. इसकी सूचना भी उन्हें दे दी गई थी. 7 अप्रैल को पशु प्रेमी द्वारा शिकायत की गई कि प्राइवेट कंपनी ने जहां रूम लिया था, वहां पर कुत्तों के कुछ संदेहास्पद अंग है. इस संबंध में कलेक्टर द्वारा जांच के निर्देश दिए गए थे, जिस पर तहसीलदार के मार्गदर्शन में नगर पालिका, कोतवाली थाने, एवं वेटरनरी की टीम के द्वारा उस कमरे का निरीक्षण किया गया तो वहां कुछ अंग पाए गए. उनके द्वारा यह अंग कहां से लाए गए, इसका क्या उद्देश्य था, यह तो जांच का विषय है. इस संबंध में थाना प्रभारी को एफआईआर के लिए आवेदन दिया गया है. वो फिलहाल पूरे मामले में जांच कर रहे हैं गजेंद्र नाफड़े ने कहा कि जो टेंडर दिया गया था उसके मुताबिक एक नसबंदी के एवज में 679 रूपये की दर निर्धारित की गई थी. उनके द्वारा कोई नसबंदी नहीं की गई. काम शुरू होने के पहले ही यह मामला सामने आ गया और इस मामले के सामने आने के पहले ही उनका ठेका निरस्त किया जा चुका था. नसबंदी के दौरान क्या प्रक्रिया रहती है इसके लिए हमने उनको कहा था की प्रक्रिया के दौरान नगर पालिका की टीम उनके साथ रहेगी लेकिन उनके द्वारा यहां कोई काम ही नहीं किया गया तो उसके बारे में हमें फिलहाल कोई जानकारी नहीं है. 
पशु चिकित्सक सुमित पटेल ने कहा कि मंडला जिले में कोई प्राइवेट कंपनी द्वारा एक एबीसी प्रोग्राम चलाया जा रहा था. जिसका नगर पालिका के साथ अनुबंध हुआ था जिसकी एनिमल एक्टिविस्ट निशा ठाकुर ने शिकायत की थी. उसी के परिपेक्ष यहां उनके घर में जांच किया गया. क्योंकि एबीसी प्रोग्राम के लोग उनके घर में ही काफी समय से रह रहे थे. लेकिन कमरा बंद रहने के कारण उन्हें शक हुआ कि कमरे में कुछ है. इसकी सूचना के बाद पुलिस विभाग, नगर पालिका, तहसीलदार और पशुपालन विभाग की टीम द्वारा उस कमरे का ताला तोड़ दिया गया. इस दौरान कमरे में हमने देखा कि दो कंटेनर में पहले से फॉर्मलीन में कुछ अंग डूबे हुए रखे हैं. जिसको हमने वहां मौके पर जाकर चेक किया तो करीब 518 नर कुत्ते के अंग और 277 मादा कुत्ते के अंग बरामद हुए. फिलहाल सभी को सील बंद करके नगर पालिका मंडला को सौंपा गया है. कमरे से बरामद ऑर्गन कितना पुराना इशका पता फोरेंसिक जांच के बाद ही हो सकेगा. वहीं जिला पशु चिकित्सालय के पशु चिकित्सक सुरेंद्र सिंह तेकाम ने बताया कि नसबंदी प्रक्रिया में बैल, डॉग के टेस्टिस निकले जाते हैं और फीमेल डॉग के ओवरी और यूट्रस निकाली जाती है.
मंडला पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा ने इस पूरे मामले में कहा कि थाना मंडला में CMO ऑफिस से एक आवेदन प्राप्त हुआ है जिसके अंतर्गत एनिमल बर्थ कंट्रोल में उन्होंने टेंडर आउट किया था जिसमें की जो संबंधित फर्म के द्वारा काम समय पर नहीं किया गया और फिर वह वहां पर अनुपलब्ध रही थी. इस दौरान एक एनिमल एक्टिविटीज के द्वारा शिकायत दर्ज करवाई गई कि जो कक्ष उन्होंने इस एनजीओ को उपलब्ध करवाया था एनिमल बर्थ कंट्रोल के लिए, वहां पर जो जानवर है, जो डॉग्स हैं, उनके फीमेल और मेल रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स का संग्रहण करवाकर रखा गया है, चूंकि शंका उत्पन्न करता था, इसके लिए संयुक्त टीम के द्वारा वहां पर छापामारी की गई और सामान को जप्त किया गया. उसके बाद सीएमओ के द्वारा एक शिकायत थाने को उपलब्ध करवाई गई है जिसमें की सभी पक्षों का पक्ष / जानकारी लेने के बाद इसमें वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.
रिपोर्ट- अशोक सोनी
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