अंश-अंशिका का अब तक पता नहीं लगा पाई झारखंड पुलिस, लापता बच्चों की बरामदगी की मांग को लेकर आज धुर्वा बंद
मासूम अंश और अंशिका के लापता हुए 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन झारखंड पुलिस के हाथ अब भी खाली हैं. बच्चों की बरामदगी की मांग को लेकर ही पूरे धुर्वा औद्यौगिक क्षेत्र को बंद रखने का आह्वान किया गया है.

JHARKHAND (RANCHI): रांची के धुर्वा औद्योगिक क्षेत्र में आज सन्नाटा पसरा हुआ है. वजह है दो मासूम बच्चों अंश और अंशिका की अब तक सकुशल बरामदगी न हो पाना. इसी को लेकर पूरे एचईसी औद्योगिक क्षेत्र में सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक पूर्ण बंद का आह्वान किया गया है. इस दौरान बाजार, हाट, दुकानें, ऑटो–टोटो और तमाम व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद हैं. बंद समर्थकों ने टायर जलाकर और बैरिकेडिंग करके आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन किया. उनकी एक ही मांग है, लापता मासूम अंश और अंशिका को जल्द से जल्द सकुशल बरामद किया जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए.

बंद की पूर्व संध्या पर निकाला गया मशाल जुलूस
गौरतलब है कि 10वें दिन भी मौसीबाड़ी क्षेत्र से लापता बच्चे अंश और अंशिका का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है. इसे लेकर बस्ती बचाओ संघर्ष समिति ने आज धुर्वा जगन्नाथपुर बंद का आह्वान किया है. वहीं पूर्व संध्या पर अंश अंशिका बचाओ संघर्ष समिति के सदस्यों के द्वारा बिरसा चौक पर मशाल जुलूस निकाला गया. सैकड़ों की संख्या में पुरुष और महिला इस जुलूस में शामिल हुए और पैदल मार्च करते हुए आम लोगों से बंद को सफल बनाने की अपील की.

पुलिस-प्रशासन की विफलता को लेकर बढ़ रहा जनाक्रोश
राजद नेता सह अंश अंशिका बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक कैलाश यादव ने कहा कि नौ दिन बाद भी अपहृत अंश-अंशिका का कोई सुराग नहीं मिला है, प्रशासन की तरफ से कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई है. जैसा कि आपको मालूम है कि विगत 2 जनवरी से मौसीबाड़ी मल्लारकोचा खटाल निवासी सुनील यादव के 5 वर्षीय अंश और 4 वर्षीय अंशिका दोनों भाई-बहन दिन के 2:30 बजे से लापता हैं. जबकि इसकी लिखित शिकायत स्थानीय धुर्वा थाना प्रभारी को दे दी गई थी. लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिलने के कारण समाज एवं क्षेत्र के लोगों में भारी जनाक्रोश व्याप्त है.

‘जनाक्रोश अब जनांदोलन में होगा तब्दील’
उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ स्वामी से विनती है कि अपहृत अंश-अंशिका सकुशल बरामद हो जायें. परिजनों एवं समाज में प्रतिदिन स्थिति मायूसी के साथ तनावपूर्ण होती जा रही है. लोगों का आक्रोश बढ़ रहा है. अब जनाक्रोश को रोकना असंभव जैसा है, इसलिए जनाक्रोश अब जनांदोलन में तब्दील हो गया है.
रिपोर्ट : यशवंत कुमार









