रांची:असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का झारखंड आकर राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलना कई सवालों को जन्म दे दिया है। सबसे बड़ा यह सवाल है कि क्या असम चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा की एंट्री से कांग्रेस डर गई है। या सच में असम से भारतीय जनता पार्टी को उखाड़ फेंकने के लिए यह कवायत की गई है। लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि बिहार विधानसभा चुनाव में झामुमो को गठबंधन से दरकिनार करने पर कांग्रेस क्यों सोई हुई थी।
असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई के झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात से राजनीतिक गलियारे में चर्चा का दौर शुरू हो गया है। चर्चा यह है कि कहीं ना कहीं असम चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा की एंट्री से कांग्रेस खेमा डर गया है। क्योंकि लगातार झारखंड के मुखिया हेमंत सोरेन असम दौरे पर जा रहे हैं।
आधिकारिक तौर पर तो यह ऐलान नहीं हुआ है।लेकिन यह साफ है कि झामुमो असम में चुनावी अखाड़े में दो-दो हाथ करने को तैयार है। शायद यही वजह है कि डैमेज कंट्रोल के लिए गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की है। हालांकि झारखंड कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि इसमें डैमेज कंट्रोल की कोई बात नहीं है।असम से भाजपा को उखाड़ फेंकना है। इसके लिए रणनीति तैयार की जा रही है।कांग्रेस और झामुमो का मकसद एक है।
झारखंड कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सोनाल शांति का कहना है कि पार्टी कभी किसी के चुनाव लड़ने से नहीं डरती। बल्कि जनता के मुद्दे पर राजनीति करती है। जनता जानती है कि हमेशा कांग्रेस उनके पक्ष में खड़ी है। असम चुनाव को लेकर झामुमो से बैठक करके तालमेल बना कर रणनीति तैयार होगी। बहरहाल झारखंड कांग्रेस भले ही यह दावा कर रही है कि भाजपा को असम से उखाड़ फेंकने के लिए रणनीति तैयार की जा रही है और इसके लिए गौरव गोगोई में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की है। लेकिन कांग्रेस को यह डर सता रहा है कि अगर झामुमो कांग्रेस के साथ असम में चुनावी मैदान में नहीं उतरती है। तो इसका खामियाजा कांग्रेस को ही भुगतना पड़ेगा।









