रांची में झारखंड पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी : 15 लाख के इनामी नक्सली सहित कुल 16 नक्सलियों ने किया आत्मसर्पण
झारखंड पुलिस मुख्यालय में बड़ा सरेंडर: भारी मात्रा में गोलियों और हथियारों के साथ मुख्यधारा में लौटे 16 नक्सली, परिजनों में खुशी की लहर

झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे 'ऑपरेशन नवजीवन-2' के तहत झारखंड पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। मंगलवार 28 जुलाई को रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान 16 खूंखार नक्सलियों ने भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियारों और गोला-बारूद के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में 11 पुरुष और 5 महिलाएं शामिल हैं, जो एक करोड़ रुपये के इनामी कुख्यात माओवादी मिसिर बेसरा के गुट से जुड़े थे, जिसमें उनका बॉडीगार्ड भी शामिल है। आत्मसमर्पण करने वालों में रीजनल, जोनल, सब-जोनल और एरिया कमेटी के शीर्ष सदस्यों समेत 15 लाख रुपये के इनामी नक्सली भी शामिल हैं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से पुलिस ने दो AK-47, एक M16 और छह इंसास राइफल सहित कुल 11 घातक हथियार, 38 मैगजीन और 1562 जिंदा कारतूस बरामद किया है। इन 16 नक्सलियों में से 15 नक्सली झारखंड के विभिन्न जिलों से हैं, वहीं एक नक्सली ओडिशा राज्य से है । इस दौरान सरेंडर करने वाले नक्सलियों और उनके परिजनों ने राहत की सांस लेते हुए जंगलों में भटक रहे अपने अन्य साथियों से भी हिंसा छोड़ राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाने और मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की।
महिला नक्सलियों ने सुनाई आपबीती
आत्मसमर्पण के बाद मुख्यधारा में लौटी पूर्व महिला नक्सलियों-चम्पा मुर्मू और सुमित्रा पूर्ति ने संगठन के भीतर होने वाले शोषण और कठिन परिस्थितियों को उजागर करते हुए बीहड़ों में छिपे अपने अन्य साथियों से भी हथियार छोड़ शांति के रास्ते पर लौटने की अपील की। साथ ही उन्होंने बताया कि कुख्यात नक्सली मिसिर बेसरा ने ही उन्हें आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया था जिसे मानते हुए उन्होंने पुलिस के समक्ष हथियार डाल दिए। अब वे मुख्यधारा में वापस लौट कर सामान्य जीवन व्यतीत करना चाहती हैं।
झारखंड में अपनी अंतिम साँसे गिन रहा है नक्सलवाद
चाईबासा एसपी अमित रेनू और आईजी अभियान नरेंद्र सिंह के अनुसार, इस साल अब तक 93 नक्सलियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, 45 ने सरेंडर किया है और मुठभेड़ में 22 मारे गए हैं। पुलिस का दावा है कि झारखंड से अब माओवादी सिंडिकेट लगभग खत्म होने की कगार पर है और बचे हुए उग्रवादियों के खिलाफ भी व्यापक अभियान जारी रहेगा।
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