सड़क पर अब नहीं बिछेंगी लाशें! 10वीं के छात्र का यह शानदार आविष्कार बड़े-बड़े इंजीनियरों को कर रहा हैरान
रौशन ने भारी वाहनों के उन 'ब्लाइंड स्पॉट' पर भी खास काम किया है, जहां ड्राइवर को आसपास खड़े लोग या छोटी गाड़ियां दिखाई नहीं देतीं। इसके लिए गाड़ी के चक्कों के पास इन्फ्रारेड सेंसर लगाए गए हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति या बाइक चक्के के पास आएगी, सेंसर तुरंत ड्राइवर को खतरे का संकेत दे देगा।

Chatra: झारखंड के चतरा जिले में इन दिनों रफ्तार का कहर देखने को मिल रहा है। आए दिन भारी वाहनों और हाईवा की चपेट में आकर बेगुनाह लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। सड़क पर दौड़ते इन 'मौत के सौदागरों' को देखकर हर कोई खौफ में है, लेकिन इसी जिले के एक 10वीं के छात्र ने इस समस्या का ऐसा शानदार तोड़ निकाला है, जिसने बड़े-बड़ों को हैरान कर दिया है। पत्थलगड़ा प्रखंड मुख्यालय के बैंक चौक पर रहने वाले रौशन प्रसाद कुशवाहा ने एक ऐसा रिमोट कंट्रोल 'स्मार्ट हाईवा' मॉडल तैयार किया है, जो एक्सीडेंट होने से पहले ही ड्राइवर को अलर्ट कर देगा।
खतरे को दूर से ही भांप लेगा सेंसर, 'ब्लाइंड स्पॉट' का भी निकाला तोड़
+2 जनता उच्च विद्यालय पत्थलगड़ा के छात्र रौशन का यह मॉडल कोई आम खिलौना नहीं है। यह आधुनिक सुरक्षा तकनीकों से लैस एक जीता-जागता Experiment है। रौशन ने बताया कि हाईवा की चपेट में आने से हो रही मौतों की लगातार खबरों ने उसे अंदर तक झकझोर दिया था, जिसके बाद उसने यह मॉडल बनाने की ठानी। इस मॉडल के सामने साउंड बेस्ड डिस्टेंस सेंसर लगा है। अगर गाड़ी के सामने अचानक कोई दीवार, दूसरा वाहन या इंसान आ जाए, तो सेंसर तुरंत खतरे को पहचान कर सायरन (बजर) बजाकर ड्राइवर को अलर्ट कर देता है।
यही नहीं, रौशन ने भारी वाहनों के उन 'ब्लाइंड स्पॉट' पर भी खास काम किया है, जहां ड्राइवर को आसपास खड़े लोग या छोटी गाड़ियां दिखाई नहीं देतीं। इसके लिए गाड़ी के चक्कों के पास इन्फ्रारेड सेंसर लगाए गए हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति या बाइक चक्के के पास आएगी, सेंसर तुरंत ड्राइवर को खतरे का संकेत दे देगा। रौशन का मानना है कि अगर इस तकनीक को असली ट्रकों में लगा दिया जाए, तो हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है।
मां की पसीने की कमाई और कबाड़ से तैयार हुआ शानदार मॉडल
रौशन की यह सफलता सिर्फ एक आविष्कार नहीं, बल्कि कड़े संघर्ष की कहानी है। करीब 6 साल पहले उसके पिता दिनेश्वर महतो का निधन हो चुका है। घर की माली हालत बेहद खराब है। ऐसे में उसकी मां सविता देवी मजदूरी करके अपने बेटे की पढ़ाई और उसके वैज्ञानिक प्रयोगों का खर्च उठाती हैं। रौशन ने बताया कि मां की मेहनत से बचाए गए पैसों से वह इलेक्ट्रॉनिक का सामान खरीदता है। महंगे उपकरणों के पैसे नहीं होते, इसलिए वह अक्सर कबाड़ और बेकार पड़ी चीजों से ही अपने प्रयोग करता है।
करीब 20 हजार रुपये की लागत से तैयार इस शानदार मॉडल का नाम उसने 'क्रैश इंपैक्ट डिफेंडर मॉडल' रखा है। इसमें ढांचे पर 13-14 हजार और सेंसर-इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पर 6-7 हजार रुपये खर्च हुए हैं। इससे पहले भी यह होनहार छात्र अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुका है। वह टीन की चादर से स्मार्ट कूलर और PVC पाइप से मिनी ट्रैक्टर भी बना चुका है।
प्रिंसिपल ने कहा- इरादों के आगे गरीबी कोई मायने नहीं रखती
रौशन का सपना यहीं खत्म नहीं होता। वह आने वाले समय में इस मॉडल में ऑटो-ब्रेक सिस्टम लगाना चाहता है, ताकि अगर ड्राइवर अलर्ट पर ध्यान न दे, तो गाड़ी खुद-ब-खुद रुक जाए। इसके अलावा, एक ऐसा कैमरा लगाने की भी प्लानिंग है जो ड्राइवर की आंखों पर नजर रखेगा और उसे नींद आने पर तुरंत जगा देगा। एक्सीडेंट की स्थिति में गाड़ी की लोकेशन सीधे परिवार और नजदीकी अस्पताल तक पहुंचने वाली तकनीक पर भी वह काम कर रहा है।
स्कूल के प्रिंसिपल उदय प्रसाद कुशवाहा और प्रबंधन समिति के अध्यक्ष विनय कुमार ने रौशन की इस बड़ी उपलब्धि पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि संसाधनों की कमी के बावजूद रौशन ने साबित कर दिया है कि मजबूत इरादों के आगे गरीबी कोई मायने नहीं रखती। लोगों का कहना है कि अगर सरकार और तकनीकी संस्थानों से रौशन जैसे छात्रों को सही सपोर्ट मिले, तो ये होनहार देश के लिए नई तकनीकें विकसित कर लाखों लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
रिपोर्ट- मो. रिजवान
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