कन्फ्यूजन ! मकर संक्रांति 14 जनवरी या 15 जनवरी को...जानें मकर राशि में कब प्रवेश करेंगे सूर्य
इस बार मकर संक्रांति या खिचड़ी का पर्व 15 जनवरी को मनाना शास्त्रसम्मत माना गया है. जबकि पंचांग के मुताबिक, मकर राशि में सूर्य आज यानी 14 जनवरी की रात करीब 9:35 बजे प्रवेश करेंगे.

Makar Sankranti 2026: प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी मकर संक्रांति की तारीख को लेकर लोगों में काफी ज्यादा कंफ्यूजन है. कई लोगों के अनुसार, 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाना अति शुभ माना जा रहा है तो कुछ लोग कल यानी 15 जनवरी 2026 (गुरुवार) को मकर संक्रांति की सही तिथि मान रहे है. तो आइए हम जानते है मकर संक्रांति 14 जनवरी या 15 जनवरी कब मनाना आपके लिए सही होगा...
मकर संक्रांति तिथि
ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, धनु राशि से निकलकर सूर्य 14 जनवरी यानी कि आज रात करीब 9 बजकर 35 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेगा. शास्त्रों के मुताबिक, उदया तिथि के आधार पर मकर संक्रांति का पर्व अगले दिन 15 जनवरी 2026, गुरुवार को मान्य होगा. ऐसे में 15 जनवरी को ही सभी प्रकार के दान-पुण्य, स्नान और पूजन करने से फल प्राप्त होगा. ज्योतिष विशेषज्ञों के मुताबिक, अधिक महत्वपूर्ण संक्रांति का संयोग होता है न कि पर्व विशेष दिन. यानी कि मकर संक्रांति या खिचड़ी पर्व मनाते हुए 15 जनवरी को खिचड़ी दान और सेवन किया जा सकता है. 15 जनवरी को प्रातः काल में ही इसका पुण्यकाल भी रहेगा.
मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त
उदयातिथि के मुताबिक, इस बार मकर संक्रांति या खिचड़ी का पर्व 15 जनवरी को मनाना शास्त्रसम्मत माना गया है. जबकि पंचांग के मुताबिक, मकर राशि में सूर्य आज यानी 14 जनवरी की रात करीब 9:35 बजे प्रवेश करेंगे. इस कारण मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी की प्रातःकाल में रहेगा. शास्त्रों की मान्यता के अनुसार, संक्रांति के बाद करीब 16 घंटे तक पुण्यकाल रहता है और संक्रांति के दिन स्नान-दान प्रातःकाल में करना ही श्रेष्ठ माना जाता है.
बता दें, षटतिला एकादशी होने की वजह से आज के दिन चावल का सेवन और दान वर्जित माना जा रहा है. इसके साथ ही एकादशी में चावल की खिचड़ी बनाना या दान करना उचित नहीं माना जाता है. 15 जनवरी को द्वादशी तिथि (15 जनवरी) को चावल और खिचड़ी का दान शास्त्रसम्मत और पुण्यकारी है. इससे यह स्पष्ट होता है कि 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति का स्नान-दान और खिचड़ी दान करना चाहिए. जिससे आपको संक्रांति की पूर्ण पुण्य की प्राप्ति होगी. 15 जनवरी की सुबह ब्रह्म मुहूर्त से लेकर करीब सुबह 7 बजकर 15 से 8 बजे तक पुण्यकाल रहेगा. लेकिन श्रद्धालु दोपहर 12 बजे तक भी इसे मना सकते हैं.
मकर संक्रांति 2026 स्नान-दान मुहूर्त
इस बार 15 जनवरी 2026 (गुरुवार) को द्वादशी तिथि पड़ रही है. यानी मकर संक्रांति का पर्व इस वर्ष 14 जनवरी को नहीं, बल्कि 15 जनवरी को मनाया जाएगा इसके साथ ही इसी दिन स्नान-दान का विशेष महत्व भी रहेगा. शास्त्रों के मुताबिक, द्वादशी तिथि को चावल का दान अत्यंत पुण्यकारी होता है. इस दिन आपके लिए चावल, खिचड़ी, तिल और कंबल का दान करना अति शुभ रहेगा. 15 जनवरी को स्नान-दान का शुभ मुहूर्त सुबह करीब 4 बजे से दोपहर 3 बजे तक रहेगा.
जानें मकर संक्रांति के महत्व
बता दें, किसी राशि विशेष पर सूर्य का घूमना (भ्रमण करना) संक्रांति कहलाता है. प्रत्येक महीने सूर्य राशि का परिवर्तन करते हैं. ऐसे में प्रत्येक वर्ष कुल 12 संक्रांतियां होती है जिसमें सबसे अहम और महत्वपूर्ण मकर संक्रांति और कर्क संक्रांति होती है. जब सूर्य मकर संक्रांति में प्रवेश करता है तो मकर संक्रांति होती है और जब मकर संक्रांति से अग्नि तत्व की शुरुआत होती और कर्क संक्रांति से जल तत्व प्रारंभ होता है तो उस वक्त सूर्य उत्तरायण होता है. मान्यता है कि इस समय भक्तों द्वारा किए गए दान और जाप का फल अनंत गुना होता है. मकर संक्रांति का पर्व प्रत्येक शहर में अलग-अलग नामों से बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है. माना यह भी जाता है कि मकर संक्रांति के दिन किए गए दान का प्रतिफल बाकी अन्य दिनों के मुकाबले काफी अधिक होता है.
मकर संक्रांति के दिन क्या करें ?
अहले सुबह उठने के बाद स्नान करें और इसके बाद सूर्य को अर्घ्य दें.
अर्घ्य देने के बाद सूर्य और शनि देव के मंत्रों का जाप करें और अगर संभव हो तो आप गीता का पाठ भी जरूर करें.
पुण्यकाल में नए अन्न, घी और कंबल का दान करें. इस वर्ष के संक्रांति में तिल और गुड़ का दान करना भी शुभ होगा.
आपको एक पीपल का पौधा भी इस दिन लगवा देना चाहिए.
भोजन में नए अन्न की खिचड़ी बनाएं, इसके बाद इस भोजन को भगवान को समर्पित करें और प्रसाद के रूप में ग्रहण करें.









