Lunar Eclipse 2026: आज, मंगलवार यानी 3 मार्च 2026 को वर्ष 2026 का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. यह महत्वपूर्ण खगोलीय घटना भारत में दृश्य रहेगी, हालांकि देश के अधिकांश हिस्सों में इसका अंतिम चरण ही देखा जा सकेगा. धार्मिक आस्था और वैज्ञानिक दृष्टिकोण दोनों ही संदर्भों में इस ग्रहण को विशेष महत्व दिया जा रहा है.
चंद्र ग्रहण के संबंध में जानकारी देते हुए पंडित नितेश कुमार मिश्रा ने बताया है कि यह चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार दोपहर 3:20 बजे प्रारंभ होगा, 4:35 बजे मध्य (परमग्रास) पर पहुंचेगा और 6:47 बजे इसका मोक्ष होगा. इस प्रकार ग्रहण की कुल अवधि लगभग तीन घंटे 27 मिनट की रहेगी.
उन्होंने स्पष्ट किया कि खगोलीय गणना के अनुसार, बिहार-झारखंड क्षेत्र में ग्रहण का प्रभाव संध्या लगभग 5:45 बजे से 6:47 बजे तक रहेगा. किंतु चंद्रमा का उदय यहां लगभग 6:15 से लेकर 6:20 बजे के आसपास होता है, इसलिए चंद्रोदय से पूर्व का चरण दृष्टिगोचर नहीं होगा. इस कारण व्यवहारिक रूप से यहां ग्रहण का दृश्य भाग लगभग 6:20 बजे से 6:47 बजे तक ही देखा जा सकेगा. चंद्रमा के क्षितिज से ऊपर आते ही ग्रहण का अंतिम अंश स्पष्ट रूप से दिखाई देगा.
क्या बिहार-झारखंड ग्रहण दिखेगा?
पूर्ण ग्रहण का वह प्रमुख चरण, जब चंद्रमा तांबे अथवा लालिमा लिए हुए दिखाई देता है, बिहार-झारखंड के अधिकांश स्थानों पर नहीं दिखेगा, क्योंकि ग्रहण का मुख्य (परमग्रास) चरण चंद्रोदय से पूर्व ही समाप्त हो चुका होगा. हालांकि उत्तर-पूर्व भारत के कुछ हिस्सों में चंद्रमा अपेक्षाकृत शीघ्र उदित होने के कारण ग्रहण का थोड़ा अधिक भाग देखने को मिल सकता है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण से लगभग नौ घंटे पूर्व सूतक काल प्रारंभ हो जाता है. इस आधार पर 3 मार्च को प्रातः लगभग 6:20 बजे से सूतक प्रभावी माना जाएगा, जो ग्रहण मोक्ष (6:47 बजे) के साथ समाप्त होगा. सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद रखे जाते हैं साथ ही इस काल में शुभ एवं मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है. ग्रहण काल में मंत्र-जाप, ईश्वर स्मरण और साधना को विशेष फलदायी माना गया है.
नंगी आंखों से सुरक्षित देख सकते हैं चंद्र ग्रहण !
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है और इसके लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती. यह एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है, जिसे आस्था और वैज्ञानिक जिज्ञासा दोनों के संगम के रूप में देखा जाता है. इस दुर्लभ खगोलीय दृश्य को लेकर देशभर में उत्सुकता बनी हुई है और लोग चंद्रोदय के समय इसके अंतिम चरण के अवलोकन की तैयारी कर रहे हैं.
रिपोर्ट- प्रिंस यादव








