6 केसों में जमानत का मतलब यह नहीं कि CCA हट जाए, निसार हसन केस में झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
झारखंड हाईकोर्ट ने कुख्यात अपराधी निसार हसन उर्फ निशु की ओर से दायर क्रिमिनल रिट याचिका पर बेहद सख्त फैसला सुनाया है।
Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने कुख्यात अपराधी निसार हसन उर्फ निशु की ओर से दायर क्रिमिनल रिट याचिका पर बेहद सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने निशु को किसी भी तरह की कानूनी राहत देने से साफ मना करते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही कोर्ट ने उसके खिलाफ झारखंड अपराध नियंत्रण अधिनियम (CCA)-2002 के तहत जारी प्रिवेंटिव डिटेंशन यानी एहतियातन हिरासत के आदेशों में दखल देने से भी इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि भले ही किसी आरोपी को सभी आपराधिक मुकदमों में नियमित जमानत मिल चुकी हो, लेकिन केवल इस आधार पर सीसीए के तहत जारी किया गया डिटेंशन ऑर्डर अपने आप गलत या अवैध साबित नहीं हो जाता।
जमानत की दलील नहीं आई काम
अदालत में निसार हसन के वकील ने दलील दी थी कि उसके मुवक्किल के खिलाफ दर्ज सभी छह आपराधिक मुकदमों में पहले ही कोर्ट से नियमित जमानत मिल चुकी है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि इसके बावजूद प्रशासन ने बिना सोचे-समझे और अपनी मनमर्जी से उसे हिरासत में रखने का आदेश जारी किया है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद कागजातों से यह साफ है कि जिले के सक्षम प्राधिकारी ने सभी तथ्यों की गहन समीक्षा और अपनी संतुष्टि के बाद ही उसे समाज के लिए बड़ा खतरा मानते हुए यह आदेश जारी किया था।
हत्या, रंगदारी और बम-बंदूक से जुड़ा है लंबा रिकॉर्ड
अदालत की कार्यवाही के दौरान सामने आया कि निसार हसन का आपराधिक रिकॉर्ड बेहद संगीन रहा है। उसके खिलाफ 6 गंभीर आपराधिक मुकदमों के अलावा विभिन्न थानों में 10 सनहा (सनहा/स्टेशन डायरी एंट्रीज) दर्ज हैं। उसके ऊपर दर्ज मुकदमों में हत्या, जानलेवा हमला, रंगदारी, आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम जैसे बेहद खौफनाक आरोप शामिल हैं। प्रशासन की नजर में वह एक आदतन अपराधी है, जिससे आम समाज और शहर की शांति व्यवस्था को सीधा खतरा है।
विदेश में बैठकर चला रहा था उगाही का सिंडिकेट
पूरा मामला जमशेदपुर से जुड़ा है, जहां 7 अक्टूबर 2025 को पूर्वी सिंहभूम के डीसी ने निसार हसन के खिलाफ सीसीए की धारा 12(1) और 12(2) के तहत डिटेंशन का आदेश जारी किया था। इसके बाद 19 दिसंबर 2025, 19 मार्च 2026 और 25 जून 2026 को उसकी हिरासत अवधि तीन-तीन महीने के लिए बढ़ाई गई, जिसे राज्य सरकार ने भी मंजूरी दी थी। सरकार ने कोर्ट को बताया कि निसार हसन जमशेदपुर के व्यापारियों, ठेकेदारों और बिल्डरों से जबरन रंगदारी वसूलने वाला बड़ा नेटवर्क चलाता है।
हद तो तब हो गई जब उसने जेल में बंद रहकर भी अपने गुर्गों के जरिए रंगदारी वसूली का धंधा जारी रखा। इतना ही नहीं, कांड संख्या 39/2024 में उस पर विदेश में बैठकर जमशेदपुर में जुर्म का खेल चलाने का गंभीर आरोप लगा था। गृह मंत्रालय ने उसका वीजा रद्द कर लुक आउट सर्कुलर जारी किया था, जिसके बाद 20 मई 2025 को उसे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से दबोचा गया था। कोर्ट ने माना कि ऐसे अपराधी का बाहर रहना कानून-व्यवस्था के लिए बड़ा सिरदर्द साबित हो सकता है।
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