
करवा चौथ आज, जानें पूजन और चंद्रमा को अर्घ्य देने शुभ मुहूर्त
पूजन के दौरान एक लोटे में जल भी रखें, शाम को इसी जल को चंद्रमा को दिया जाता है. साथ ही पूजा करते समय करवा चौथ की व्रत की कथा आवश्य सुने.

पूजन के दौरान एक लोटे में जल भी रखें, शाम को इसी जल को चंद्रमा को दिया जाता है. साथ ही पूजा करते समय करवा चौथ की व्रत की कथा आवश्य सुने.

महिलाएं लाल जोड़े में सज-धजकर पूजा करती है और शाम को करवा माता की पूजा और कथा सुनती हैं और इसके बाद वे चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं और पति के हाथों से पानी पीकर अपना निर्जला व्रत पारण (तोड़ती) करती हैं.

मान्यता है कि कन्याओं में स्वयं मां देवी दुर्गा का वास होता है इस दिन कन्या पूजन के बाद उन्हें भोजन और उपहार देने से माता अति प्रसन्न हो जाती है और साधक को अपनी कृपा और उनके सभी कार्यों में सफलता प्रदान करती है

दशहरा एक महत्वपूर्ण पर्व है इसे गोरखा जवान उल्लास के साथ मनाते हैं आज फूलपाती यानी सप्तमी है फूलपाती एक निमंत्रण है इस दिन जवान देवी सरस्वती को लेकर जाते हैं और कत्यानी देवी को मनाकर लाते है.

बड़ा तालाब में भारी बारिश की वजह से पानी का स्तर काफी बढ़ गया है. माता दुर्गा के विसर्जन के दौरान किसी तरह की कोई घटना न हो, इसे लेकर रांची नगर निगम के कर्मियों द्वारा यहां मार्किंग किया जा रहा है.

पूजा में किसी तरह की कोई घटना या बड़ा हादसा न हो इसपर झारखंड पुलिस पूरी तरह से चौकस है. सुरक्षा की दृष्टि से इन शहरों में अतिरिक्त सुरक्षा बल को भी तैनात कर दिया गया है.

हिंदू धर्म शास्त्रों के मुताबिक, मां दुर्गा की चौथी स्वरूप मां कुष्मांडा सूर्यमंडल के भीतर के लोक में निवास करती हैं इस लोक में रहने की क्षमता और शक्ति सिर्फ मां कुष्मांडा में ही हैं जिससे उनके शरीर की कांति सूर्य के समान तेज है.

नवरात्रि, जो कि शक्ति की उपासना का पर्व है, नौ दिनों तक देवी दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है. नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है. यह दिन साधकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह आध्यात्मिक जागृति और आंतरिक शक्ति के विकास का प्रतीक माना जाता है.

माता की उपासना करने से भक्त में वैराग्य, त्याग, संयम और सदाचार जैसे गुण उत्पन्न होते हैं और भक्त चाहे कितनी भी बड़ी संकट क्यों न आ पड़े, माता के आशीर्वाद से वे अपने कर्तव्यों से विचलित नहीं होते है.

कलश स्थापना को लेकर सोमवार को गिरिडीह में कई स्थानों पर कलश यात्रा निकाला गया. इस दौरान सिहोडीह आम बगान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल से भव्य कलश यात्रा निकाला गया.

सार्वजनिक दुर्गा स्थान से निकले भव्य कलश यात्रा में भक्तों की भीड़ जुटी. सभी गाजे बाजे के कलश यात्रा में शामिल हुईं. इस दौरान उन्होंने पूरे पचम्बा का भ्रमण किया.

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ भक्त मां दुर्गा का आह्वान करते हैं इसके बाद मां शैलपुत्री की पूजा करते हैं. शैलपुत्री मांग दुर्गा का पहली स्वरूप है.

