Naxatra News Hindi
Ranchi Desk: शारदीय नवरात्रि का अंतिम यानी कि महानवमी आज पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है. इस दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप माता सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना की जाती है. हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महानवमी के दिन माता सिद्धिदात्री की विधिपूर्वक पूजा करने से माता प्रश्न होकर अपने भक्तों को उनके जीवन में सिद्धि, सफलता, और सुख समृद्धि से भर देती है. दुर्गोत्सव के नौ दिनों का विशेष महत्वतो होता ही है साथ ही नौवे दिन यानी महानवमी को विशेष रुप से कन्या पूजन और हवन का आयोजन करते हुए भक्त माता को प्रसन्न करते हैं.
महानवमी के दिन माता देवी की आराधना, हवन और कन्या पूजन किया जाता है. इसके उपरांत नवमी के तिथि के बाद पारण कर व्रत का समापन किया जाता है. नवरात्रि की नवमी तिथि को कन्या पूजन का खासतौर पर विशेष महत्व होता है. मान्यता है कि कन्याओं में स्वयं मां देवी दुर्गा का वास होता है इस दिन कन्या पूजन के बाद उन्हें भोजन और उपहार देने से माता अति प्रसन्न हो जाती है और साधक को अपनी कृपा और उनके सभी कार्यों में सफलता प्रदान करती है.
ये है माता के पूजन का मंत्र
मूल मंत्रः ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः
दुर्गा मंत्रः या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥
हवन मंत्रः ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे स्वाहा
कब करें नवरात्रि व्रत का पारण
दुर्गोत्सव के अवसर पर 9 दिनों के व्रत को आप नवमी तिथि को माता दुर्गा के नौवें स्वरूप देवी सिद्धिदात्री की पूजा और कन्या पूजन करने के बाद व्रत पारण कर सकते हैं. इसके अलावा नवरात्रि व्रत का पारण दशमी को सूर्योदय के बाद भी किया जा सकता है. दशमी के दिन नवरात्रि व्रत का पारण करने वाले भक्त 2 अक्टूबर, गुरुवार को सुबह 06 बजकर 15 मिनट के बाद कर सकते हैं. इसके अलावे दशहरा के दिन भी किया जा सकता है नवमी के दिन व्रत का पारण पारंपरिक रूप से ज्यादा प्रचलित है, जबकि दशहरा का दिन भी धार्मिक व आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है.








