हेमंत सरकार की बढ़ेगी टेंशन?, JPSC में गड़बड़ी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, सोमवार को...
याचिकाकर्ता हरीशरण देवगन ने 19 अप्रैल को हुई इस प्रारंभिक परीक्षा की पूरी प्रक्रिया, उसकी पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। याचिका में साफ तौर पर मांग की गई है कि इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जानी चाहिए, ताकि सच सबके सामने आ सके।

JPSC Supreme Court: झारखंड में इन दिनों प्रतियोगी परीक्षाओं और उनमें हो रही गड़बड़ियों को लेकर बवाल थमता नजर नहीं आ रहा है। अब झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 में हुई कथित धांधली का मामला सीधा सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। याचिकाकर्ता हरीशरण देवगन ने 19 अप्रैल को हुई इस प्रारंभिक परीक्षा की पूरी प्रक्रिया, उसकी पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
याचिका में साफ तौर पर मांग की गई है कि इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जानी चाहिए, ताकि सच सबके सामने आ सके। इस बेहद अहम मामले पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करने जा रहा है और मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस पर अपना फैसला सुनाएगी।
हाईकोर्ट से पहले ही सरकार को लग चुका है तगड़ा झटका
सुप्रीम कोर्ट में यह मामला ऐसे वक्त में पहुंचा है जब झारखंड में छात्र लगातार सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ हेमंत सोरेन सरकार को इस मामले में झारखंड हाई कोर्ट से पहले ही एक बड़ा झटका लग चुका है। दरअसल, छात्रों के भारी विरोध के बाद सरकार ने 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षाओं को रद्द कर दिया था और इसके आधार पर हुई नियुक्तियां भी खत्म कर दी थीं। लेकिन 20 अगस्त को हाई कोर्ट ने सरकार के इस फैसले पर रोक लगा दी। अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है और अब अगली सुनवाई 15 सितंबर को होनी है।
सरकार ने दी गड़बड़ी की दलील, कोर्ट ने रख दी यह शर्त
झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान हेमंत सोरेन सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि इस पूरी भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली और गड़बड़ियां हुई हैं, इसीलिए पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करने का कड़ा फैसला लिया गया। सरकार ने कोर्ट को यह भी बताया कि शिकायतों के आधार पर CID ने अपनी जांच शुरू कर दी है और कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं। हालांकि, सरकार की इन दलीलों के बावजूद हाई कोर्ट ने नियुक्तियों को रातों-रात खत्म करने के तरीके पर कड़ी आपत्ति जताई।
अदालत ने राहत देते हुए यह भी साफ कर दिया है कि याचिकाकर्ताओं को एक शपथपत्र देना होगा कि वे क्रिमिनल केस में ट्रायल कोर्ट के अंतिम फैसले को मानेंगे। अगर जांच में कोई ऐसा सुबूत मिलता है जिससे कानूनी कार्रवाई जरूरी हो, तो सरकार कानून के दायरे में रहकर कदम उठा सकेगी। बताते चलें कि भारी दबाव के बीच 18 अगस्त को राज्य सरकार ने एक साथ 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द कर दी थीं और 23 अन्य परीक्षाओं की जांच के आदेश दिए थे।
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