90% राजस्व राज्यों का, फिर भ्रम क्यों?, MMDR विधेयक 2026 पर संजय सेठ का विपक्ष पर तीखा हमला
MMDR विधेयक 2026 को लेकर संजय सेठ ने विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि खनिज राजस्व का करीब 90% हिस्सा राज्यों को मिलेगा और झारखंड की आय बढ़ेगी।

झारखंड की खनिज संपदा और नए खान एवं खनिज संशोधन विधेयक 2026 यानी MMDR बिल को लेकर चल रही बयानबाजी के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विरोधियों को करारा जवाब दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि यह नया विधेयक झारखंड जैसे खनिज संपदा से समृद्ध राज्यों की तकदीर और तस्वीर दोनों बदलने वाला है। इस कानून के लागू होने से न सिर्फ राज्यों की कमाई बढ़ेगी, बल्कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के सपने को पूरा करने में भी एक मील का पत्थर साबित होगा।
90 फीसदी राजस्व राज्यों को ही मिलेगा, विपक्ष फैला रहा है भ्रम
संजय सेठ ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा और कहा कि इस कानून को लेकर लोगों के बीच गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं। उन्होंने साफ किया कि केंद्र सरकार ने राज्यों के अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया है। खनिजों से मिलने वाले राजस्व का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा पहले की तरह सीधे राज्यों के खजाने में ही जाएगा। इससे राज्यों की आय में भारी इजाफा होगा और गांवों तक विकास की नई बयार बहेगी। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे इस ऐतिहासिक कानून पर राजनीति करने के बजाय इसके प्रावधानों को समझें और राज्य के हित में इसका समर्थन करें।
2014 के मुकाबले 618 प्रतिशत बढ़ा राजस्व, पेश किए आंकड़े
आंकड़ों का हवाला देते हुए रक्षा राज्य मंत्री ने बताया कि साल 2014 से पहले झारखंड को खनिज क्षेत्र से हर साल महज 4,662 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता था। मोदी सरकार की नीतियों के कारण वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 33,494 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है। यानी राज्य की कमाई में करीब 618 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद सिर्फ टैक्स बढ़ाना नहीं है, बल्कि एक ऐसा पारदर्शी और साफ-सुथरा सिस्टम बनाना है जिससे राज्य में नया निवेश आए, फैक्ट्रियां लगें और स्थानीय युवाओं को ज्यादा से ज्यादा रोजगार के मौके मिलें।
देरी की वजह से हुआ 400 करोड़ का नुकसान, अब नहीं चलेगी सुस्ती
संजय सेठ ने राज्य में प्रशासनिक ढिलाई पर चिंता जाहिर करते हुए सिंहभूम के विजया-2 प्रोजेक्ट का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि नौ महीने तक लीज न मिलने के कारण झारखंड को करीब 400 करोड़ रुपये के राजस्व का सीधा नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब झारखंड के पास खनिजों का अटूट खजाना है, तो सरकारी फाइलों की सुस्ती के कारण राज्य की कमाई और युवाओं का रोजगार क्यों रोका जाए? अब किसी भी प्रोजेक्ट में इस तरह की अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नक्सलवाद के बाद अब खनिज माफिया पर होगी अगली स्ट्राइक
गृह मंत्री अमित शाह के अभियानों का जिक्र करते हुए संजय सेठ ने कहा कि जिस तरह से देश और राज्य से नक्सलवाद का सफाया किया गया है और वह अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है, ठीक उसी तरह अब अवैध खनन और खनिज चोरी करने वाले माफियाओं की कमर तोड़ी जाएगी। केंद्र सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अब खनिजों की चोरी को पूरी तरह रोका जाएगा। उन्होंने कहा कि जितना ज्यादा वैध खनन होगा, उतना ही ज्यादा पैसा राज्य के विकास में लगेगा। झारखंड की अनमोल खनिज संपदा को अब भ्रष्टाचार और लालफीताशाही की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा।
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