वोट लिया और भूल गए!, चतरा के कई मोहल्लों में कमरों तक पहुंचा गंदा पानी, कबाड़ बन रहीं नगर परिषद की गाड़ियां
चतरा में बारिश का मौसम किसानों के लिए भले ही राहत लेकर आया हो, लेकिन आम शहरियों के लिए यह किसी बड़ी मुसीबत से कम साबित नहीं हो रहा है।


Chatra: चतरा में बारिश का मौसम किसानों के लिए भले ही राहत लेकर आया हो, लेकिन आम शहरियों के लिए यह किसी बड़ी मुसीबत से कम साबित नहीं हो रहा है। नगर परिषद के बड़े-बड़े दावों की पोल खुल चुकी है और बारिश का बदबूदार गंदा पानी लोगों के बेडरूम और कमरों तक पहुंच गया है। चुनाव के समय लंबे-चौड़े वादे करने वाले नेता अब जनता को उनके हाल पर छोड़कर गायब हैं।
सोशल मीडिया पर लाइव भाषण, जमीन पर नारकीय जिंदगी
चतरा सदर के वार्ड नंबर 14 और 15, अंसार नगर, बिंड मोहल्ला और वादी इरफा जैसे इलाकों में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। नगर परिषद परिसर में सफाई की दर्जनों गाड़ियां खुले आसमान के नीचे खड़ी-खड़ी कबाड़ बन रही हैं, लेकिन सड़कों से कचरा और पानी निकालने वाला कोई नहीं है। नगर परिषद अध्यक्ष अतौर रहमान का पूरा ध्यान फेसबुक और इंस्टाग्राम लाइव पर भाषण देने में लगा है, जबकि उनके अपने वार्ड की जनता बदबूदार पानी के बीच नारकीय जिंदगी जीने को मजबूर है।
सांसद जी ने सरकार पर फोड़ा ठीकरा, खुद झाड़ा पल्ला
स्थानीय विधायक और प्रशासन तो गायब हैं ही, चतरा के सांसद कालीचरण सिंह भी इस मुसीबत के वक्त अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते दिखे। उन्होंने जलभराव का पूरा दोष राज्य की हेमंत सरकार और अफसरों पर मढ़ दिया। सांसद ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार 'मंईयां सम्मान' योजना में बिजी है, उसे लोगों के घरों में घुस रहे पानी से भला क्या लेना-देना! उन्होंने अफसरों को नसीहत तो दे दी, लेकिन खुद धरातल पर उतरकर कोई मदद नहीं की।
नालों में गिर रहे बच्चे, बुजुर्गों का निकलना दूभर
लोग वार्ड पार्षद से लेकर नगर परिषद दफ्तर तक लिखित शिकायतें दे-देकर थक चुके हैं, लेकिन सोए हुए सिस्टम के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। स्थिति यह है कि पानी भरा होने की वजह से छोटे बच्चे नाले में गिर रहे हैं और बुजुर्गों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। परेशान लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि क्या वे सिर्फ टैक्स भरने और वोट बैंक बनने के लिए ही हैं?

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