अबुआ आवास की हकीकत, घर नहीं मिला तो स्कूल में रहने को मजबूर आदिवासी परिवार
तिसरी प्रखंड के बड़कीलतबेधवा गांव में एक आदिवासी परिवार पक्का घर नहीं मिलने के कारण हर बरसात में सरकारी विद्यालय में रहने को मजबूर है। आवास योजना में नाम होने के बावजूद अब तक मकान नहीं मिला।


गिरिडीह: झारखंड सरकार की अबुआ आवास योजना का मकसद गरीब और बेघर परिवारों को पक्के मकान मुहैया कराना है। इसी तरह, केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) भी इसी उद्देश्य से चल रही है। लेकिन गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड में एक आदिवासी परिवार आज भी अपने पक्के घर का इंतजार कर रहा है। जैसे ही बारिश का मौसम आता है, इस परिवार को अपनी झोपड़ी छोड़कर सरकारी स्कूल में शरण लेनी पड़ती है। यह मामला गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड के बड़कीलतबेधवा गांव का है। यहां रहने वाली सोरेन की पत्नी का परिवार सालों से कच्ची झोपड़ी में रहने को मजबूर है। बारिश होते ही झोपड़ी से पानी टपकने लगता है, जिससे घर में रहना बेहद मुश्किल हो जाता है। ऐसे में, हर साल की तरह इस बार भी वह अपने बच्चों के साथ गांव के सरकारी विद्यालय के एक कमरे में रहने चली गई हैं।
आवास योजना में नाम होने के बावजूद नहीं मिला घर
परिवार का कहना है कि उनका नाम आवास योजना की सूची में तो है, लेकिन अब तक उन्हें पक्का मकान नहीं मिला। बरसात के दिनों में उनकी झोपड़ी रहने लायक नहीं रहती, इसलिए बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें स्कूल में शरण लेनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति कोई नई बात नहीं है। हर साल बारिश के मौसम में यही हालात होते हैं और परिवार को अपने घर की बजाय विद्यालय में दिन-रात बिताने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
योजनाओं के क्रियान्वयन पर उठ रहे सवाल
गांव के मुखिया मदन यादव ने यह स्वीकार किया कि पत्नी सोरेन का परिवार बहुत गरीब है और उन्हें लंबे समय से एक घर की जरूरत है। उन्होंने बताया कि साल 2024 में मनरेगा के तहत उन्हें पशु शेड योजना का लाभ दिलाने की कोशिश की गई थी, लेकिन फंड की कमी के चलते वह योजना पूरी नहीं हो पाई। मुखिया का कहना है कि परिवार को जल्द से जल्द आवास योजना का लाभ मिलना चाहिए, ताकि हर बरसात में उन्हें विद्यालय में शरण लेने के लिए मजबूर न होना पड़े।
इस घटना ने एक बार फिर से ग्रामीण क्षेत्रों में आवास योजनाओं के कार्यान्वयन पर सवाल उठाए हैं। सरकारें गरीबों को पक्का घर देने का वादा करती हैं, लेकिन कई योग्य परिवार अब भी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। बड़कीलतबेधवा गांव की यह तस्वीर यह दर्शाती है कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक समय पर पहुंचाना कितना महत्वपूर्ण है। हालांकि, इस मामले में संबंधित विभाग ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि पात्रता सूची में नाम होने के बावजूद परिवार को अब तक आवास क्यों नहीं मिल पाया।

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