"सच बोलना ही गुनाह हो गया..", अंश-अंशिका मामले में निर्दोष दुकानदार की पिटाई, मां ने सुनाई दास्तान
बच्चों की बरामदगी सकुशल हो पाई, जिससे कांति देवी का परिवार भी खुश है. लेकिन वे कहती हैं कि वह भी एक बच्चे की मां हैं और निर्दोष होने के बावजूद उन्हें पुलिस के हाथों यह प्रताड़ना झेलनी पड़ी- "इसकी भरपाई कौन करेगा?"

JHARKHAND (RANCHI): धुर्वा के मौसीबाड़ी क्षेत्र से अगवा किए गए मासूम बच्चे अंश और अंशिका का पुलिस ने पता लगा लिया, अपहरणकर्ता पति-पत्नी को पुलिस द्वारा गिरफ्तार भी कर लिया गया है. लेकिन इस मामले में पहली बार जब पुलिस ने मामले की छानबीन करनी शुरु की, तो उस दुकानदार को हिरासत में ले लिया जिसकी दुकान पर दोनों बच्चे बिस्किट खरीदने गए थे. दुकानदार की मां कांती देवी ने बताया कि पुलिस जबरन गुनाह कबूल कराना चाहती थी, जबकि वे दोहराते रहे कि वे निर्दोष हैं.
पुलिस ने जमकर की निर्दोष की पिटाई
बीते 2 जनवरी से दोनों बच्चे अंश और अंशिका लापता थे, जिनका 14 जनवरी सुबह पुलिस को पता चलता है और उन्हें सकुशल अपने माता-पिता के पास मौसीबाड़ी ले जाया जाता है. पूरा धुर्वा सहित पूरे रांची में बच्चों के मिलने की खुशी थी. ये अवसर होली-दीवाली से कम नहीं था. इस बीच कुछ चेहरों पर खुशी के साथ गम के आंसू भी देखे गए, वे चेहरे थे दुकानदार कांति देवी और उनके बेटे के. पुलिस ने जब खोजबीन तेज की तो सबसे पहले पूछताछ की गई उसी दुकानदार और उसके परिवार के साथ, जिन्होंने अंतिम बार बच्चों को अपने दुकान पर देखा था. कांति देवी ने बताया कि उन्हें और उनके बेटे को पुलिस ने पांच दिनों तक हिरासत में रखा और उनपर जोर आजमाइश भी खूब की गई.
"कौन करेगा हमारी भरपाई.."
उन्होंने घटना के दिन की बात करते हुए बताया कि जिस दिन बच्चे लापता हुए, उस दिन दुकान पर उनकी बहू थी जिस वक्त दोनों बच्चे दुकान पर आए थे. फिर क्या पुलिस ने पूरे परिवार को हवालात में घसीट डाला. कांति देवी बताती हैं कि उनके बेटे के साथ जमकर मारपीट की गई. सिर्फ यही नहीं उनके घर की, उनके बैंक खातों की भी जांच की गई. लेकिन पुलिस को कुछ हाथ नहीं लगा. तब पर भी पुलिस ने 5 दिनों तक उनके बेटे को पुलिस कस्टडी में रखा. उनसे जबरन कबुलवाने का प्रयास किया जाता रहा. वहीं बताते चलें कि पुलिस और सरकार पर लगातार मीडिया और विपक्ष द्वारा दबाव बनाया जाता रहा, जिसका परिणाम सकारात्मक ही निकलकर आया कि बच्चों की बरामदगी सकुशल हो पाई. कांति देवी का परिवार भी इससे खुश है लेकिन वे कहती हैं कि वह भी एक बच्चे की मां हैं और निर्दोष होने के बावजूद उन्हें पुलिस के हाथों यह प्रताड़ना झेलनी पड़ी- "इसकी भरपाई कौन करेगा?"
फोन भी कर लिया था जब्त
उन्होंने बताया कि उस दौरान उनके घर और बैंक खाते भी खंगाले गए थे पुलिस द्वारा, वही उनके मोबाइल फोन भी पुलिस ने जब्त कर लिए थे. जो अब तक उन्हें नहीं सौंपे गए हैं. बताया कि उनके द्वारा पूछे जाने पर बस इतना ही कहा गया कि 'मिल जाएगा'.









