युवाओं के प्रेरणाश्रोत स्वामी विवेकानंद का वो ऐतिहासिक भाषण, तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा था शिकागो ऑडिटोरियम
"Sisters and brothers of America.." उनके इन शब्दों से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आए लोग इसलिए भी मंत्रमुग्ध हो गए थे, क्योंकि....

SWAMI VIVEKANAND: "जीवन का रास्ता बना बनाया नहीं मिलता और जिसने जैसा रास्ता बनाया, उसे वैसी ही मंजिल मिलती है". ये विचार हैं एक विश्व प्रसिद्ध दार्शनिक के - जिन्हें हम स्वामी विवेकानंद जी के नाम से जानते हैं. 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में जन्में स्वामी विवेकानंद जी को बचपन में नरेंद्र के नाम से जाना जाता था. इन्हीं के जन्मोत्सव को 1984 में भारत सरकार द्वारा युवा दिवस के तौर पर मनाया जाना निश्चित किया गया.
Indian Institute of Science के पीछे विवेकानंद की दूरदर्शी सोच
अपने बेहद प्रचलित शिकागो स्पीच को देने विवेकानंद वायुमार्ग से यूएस जा रहे थे. प्लेन में ही उनकी मुलाकात हुई जमशेद जी टाटा साहब से. उनसे काफी बातचीत होने के बाद विवेकानंद जी ने उनसे शिकागो जाने के उद्देश्य के बारे पूछा. जनशेदजी टाटा ने बताया कि वे वहां जाकर नए-नए बिजनेस आईडिया साझा करेंगे. इसी बात पर विवेकानंद जी ने उन्हें सुझाव दिया कि क्यों न वे भारत में साइंस से संबंधी संस्थान की स्थापना पर विचार करें; और विवेकानंद के इन्हीं सुझाव व विचार का परिणाम रहा कि जमशेदजी टाटा ने वापस भारत आकर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस की स्थापना की. हमेशा युवाओं के भविष्य और उन्नति संबंधी विचार रखने वाले विवेकानंद जी का शिकागो में दिया भाषण आज भी कई संस्थानों में पढ़ाया जाता है, हर वर्ष उनकी जयंती के दिन इसपर चर्चाएं की जाती हैं.
"Sisters and brothers of America.."
11 सितंबर 1893 को स्वामी विवेकानंद जी ने अमेरिकी शहर शिकागो में खड़े होकर अपने भाषण की शुरुआत इन्हीं शब्दों से की थी - "Sisters and brothers of America". जिसके बाद पूरा ऑडिटोरियम तालियों की गूंज से भर गया था. कहते हैं कि इसके बाद अगले ढाई मिनटों तक सात हजार लोगों से खचाखच भरे हॉल में तालियों की गूंज सुनाई देती रही थीं. उनके इन शब्दों से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आए लोग इसलिए भी मंत्रमुग्ध हो गए थे, क्योंकि 'वसुधैव कुटुंबकम' की राह पर चलने वाले भारत की इस सोच को विश्व पटल पर पहली दफा एक आवाज प्राप्त हुई थी.
बाल नरेंद्र का कैसा था बचपन?
बाल नरेंद्र (स्वामी विवेकानंद) का बचपन बहुत कुशाग्र बुद्धि, चंचल, साहसी और आध्यात्मिक रुझान वाला था; वे बचपन से ही ध्यानमग्न हो जाते, गहन प्रश्न पूछते और ईश्वर की तलाश करते थे, साथ ही नटखट और ऊर्जावान भी थे, जो उन्हें अन्य बच्चों से अलग बनाता था. उनके पिता के वकील होने के कारण घर में विद्वत्तापूर्ण माहौल रहता. वहीं उनकी माता धार्मिक प्रवृत्ति की थीं. जिससे उनमें बचपन से ही ज्ञान की प्यास और समाज के प्रति जागरूकता विकसित हुई. वे बहुत बुद्धिमान थे और उनकी स्मरण शक्ति तीव्र थी, जिससे वे शिक्षकों और बड़ों को भी निरुत्तर कर देते थे. एक प्रचलित बात यह भी मानी जाती है कि विवेकानंद की तीव्र बुद्धि ऐसी थी कि वे जिन किताबों को आमतौर पर पढ़ने में लोग कई दिन लगाते थे, उन्हीं पुस्तकों को विवेकानंद एक दिन में पढ़ लिया करते थे.
युवा दिवस मनाने का उद्देश्य?
भारत में हर साल 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती मनाने के लिए राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है, जो एक जाने-माने दार्शनिक, आध्यात्मिक गुरु और भारत के युवाओं के लिए सबसे बड़ी प्रेरणाओं में से एक थे. भारत सरकार ने 1984 में इस दिन को राष्ट्रीय युवा दिवस घोषित किया ताकि युवाओं को विवेकानंद की शिक्षाओं से जोड़कर उन्हें प्रेरित किया जा सके और राष्ट्र निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा दिया जा सके.
सेमिनार व वर्कशॉप का किया जाता है आयोजन
इस मौके पर, युवा पीढ़ी स्कूलों और कॉलेजों में डिबेट, भाषण और निबंध प्रतियोगिताओं जैसी कई गतिविधियों में हिस्सा लेती है. लीडरशिप, चरित्र निर्माण और सामाजिक जिम्मेदारी पर फोकस करते हुए युवा सम्मेलन, सेमिनार और वर्कशॉप भी आयोजित किए जाते हैं. NCC, NSS और युवा समूहों जैसे संगठनों द्वारा कई सामुदायिक सेवा कार्यक्रम भी चलाए जाते हैं.
पीएम देश भर के 3 हजार युवाओं से होंगे मुखातिब
सरकारी प्रेस रिलीज के अनुसार, युवा दिवस के अवसर पर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 जनवरी को नई दिल्ली के भारत मंडपम में शाम करीब 4:30 बजे विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 के समापन सत्र में हिस्सा लेंगे. जहां वे करीब तीन हजार युवाओं से बात करेंगे.









