UGC कानून पर सुप्रीम कोर्ट की रोक केंद्र सरकार के लिए चेतावनी, कोर्ट के आदेश का स्वागत- अभिजीत सिंह चौहान
'आज का भारत जाति, धर्म और मजहब के नाम पर कानून बनाने का भारत नहीं है. कानून अपराध और गलत कर्म के आधार पर होना चाहिए, न कि किसी विशेष जाति या वर्ग को निशाना बनाने या संरक्षण देने के लिए.'

Bihar (Motihari): ढाका विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी अभिजीत सिंह चौहान ने यूजीसी से जुड़े नए कानून पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक को केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल और एक स्पष्ट चेतावनी बताया है. उन्होंने कहा कि यह फैसला साबित करता है कि बिना व्यापक विमर्श और जमीनी सच्चाई को समझे बनाए जा रहे कानून देश की शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
अभिजीत सिंह चौहान ने कहा कि आज का भारत जाति, धर्म और मजहब के नाम पर कानून बनाने का भारत नहीं है. कानून अपराध और गलत कर्म के आधार पर होना चाहिए, न कि किसी विशेष जाति या वर्ग को निशाना बनाने या संरक्षण देने के लिए. दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र सरकार और यूजीसी शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भी समाज को बांटने वाली व्यवस्था लागू करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा जातिवादी हॉस्टल व्यवस्था पर उठाए गए सवाल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि छात्रों को जातियों में बांटकर हॉस्टल बनाना न केवल असंवैधानिक है बल्कि सामाजिक सौहार्द को तोड़ने वाला कदम है. शिक्षा का उद्देश्य जोड़ना है, तोड़ना नहीं.
आरक्षण के मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत सिंह चौहान ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आज वही सवाल उठाया है जिसे वर्षों से दबाया जाता रहा है कि आरक्षण का लाभ बार-बार वही लोग क्यों उठा रहे हैं जो अब आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त हो चुके हैं. यह गरीबों के अधिकारों की खुली लूट है. आरक्षण गरीब के लिए होना चाहिए, चाहे वह किसी भी जाति या वर्ग से हो. उन्होंने कहा कि एससी, एसटी, ओबीसी या किसी भी वर्ग में यदि कोई परिवार सशक्त हो चुका है तो आरक्षण का लाभ वास्तव में जरूरतमंद तक पहुंचना चाहिए. इसके लिए अब टालमटोल नहीं, बल्कि ईमानदार पुनर्विचार की आवश्यकता है.
अभिजीत सिंह चौहान ने कहा कि शिक्षा समाज की रीढ़ है और हर बच्चे को समान अवसर मिलना चाहिए. देश को अब समान शिक्षा व्यवस्था और समान कानून की ओर बढ़ना होगा. सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी कानून पर रोक लगाना लोकतंत्र और संविधान की जीत है. अंत में उन्होंने केंद्र सरकार और यूजीसी से मांग की कि वे अहंकार छोड़कर सुप्रीम कोर्ट के सवालों का गंभीरता से जवाब दें और पूरे देश के छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक न्यायसंगत, समावेशी और समान शिक्षा कानून लाएं.
रिपोर्ट- प्रतिक सिंह









