Bihar (Nalanda): बिहारशरीफ के पी.एम.एस. कॉलेज में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर अब विवाद गहराता जा रहा है. शिक्षकों और कर्मचारियों का गुस्सा अब सड़कों पर फूट पड़ा है. ढाई करोड़ रुपये के अनुदान में गड़बड़ी के आरोपों के बीच सचिव और प्रभारी प्राचार्य के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया गया है.

बिहारशरीफ के अस्पताल चौराहे पर उस वक्त माहौल गर्म हो गया, जब पी.एम.एस. कॉलेज के शिक्षकों और कर्मचारियों ने सचिव डॉ. रघुनाथ प्रसाद कच्छवे और प्रभारी प्राचार्य डॉ. बलराम प्रसाद सिंह के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया. प्रोफेसर डॉ. संजय कुमार के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने दोनों का पुतला दहन किया और आरोप लगाया कि करीब ढाई करोड़ रुपये के अनुदान में भारी अनियमितता और पक्षपात किया गया है.
शिक्षकों का कहना है कि सरकारी अनुदान और सुरक्षा कोष की राशि का वितरण पूरी तरह से अपारदर्शी तरीके से किया गया. कई शिक्षकों को उनके हक का 50 से 70 प्रतिशत तक कम पैसा मिला, जबकि कुछ अपात्र लोगों को भी लाभ दिया गया.

इंग्लिश विभाग के सहायक प्रोफेसर सूर्यकांत वर्मा ने आरोप लगाया कि 2007 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को भी भुगतान किया गया, जो नियमों के खिलाफ है. इतना ही नहीं, जहां शिक्षकों को 30 से 50 हजार रुपये मिले, वहीं कुछ चपरासियों को डेढ़ लाख रुपये तक दिए गए. सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि वरिष्ठ शिक्षकों को नजरअंदाज कर जूनियर कर्मचारियों को ज्यादा राशि दी गई, जिससे असंतोष और बढ़ गया है.
वहीं, केमिस्ट्री विभाग की डॉ. प्रियंका कुमारी ने इस पूरे मामले को व्यापक भ्रष्टाचार करार देते हुए कहा कि भविष्य में अनुदान का वितरण सरकारी गाइडलाइन के अनुसार पारदर्शी तरीके से होना चाहिए. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बार-बार मांग के बावजूद सचिव द्वारा आमसभा नहीं बुलाई जा रही है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
इस मामले में कुलपति और राज्यपाल समेत संबंधित अधिकारियों को जांच के लिए आवेदन भी भेजा गया है. शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा. फिलहाल, कॉलेज प्रशासन की ओर से इन गंभीर आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
अब देखना होगा कि इतने गंभीर आरोपों के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होती है या नहीं. फिलहाल, इस मुद्दे ने बिहारशरीफ में सियासी और शैक्षणिक माहौल को गरमा दिया है.
रिपोर्ट: वीरेंद्र कुमार






