70 रुपये किलो चीनी और मंत्री का ‘डायबिटीज’ वाला बयान! आखिर क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
पटना में चीनी की कीमत 70 रुपये किलो तक पहुंचने की खबरों के बीच बिहार के मंत्री श्रवण कुमार के ‘डायबिटीज’ वाले बयान ने राजनीतिक और सोशल मीडिया बहस छेड़ दी है। जानिए चीनी के दाम बढ़ने की असली वजह और सरकार ने क्या कदम उठाए हैं।


पटना: रसोई में चाय की मिठास इन दिनों जेब का स्वाद बिगाड़ रही है। पटना में चीनी की खुदरा कीमत कुछ ही दिनों में करीब 50 रुपये से बढ़कर 70 रुपये किलो तक पहुंचने की खबरों के बीच बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार का एक बयान अब चर्चा का केंद्र बन गया है। उन्होंने बढ़ती कीमतों पर कहा कि लोग वैसे भी कम चीनी खा रहे हैं और आजकल बहुत से लोग डायबिटीज से परेशान हैं, इसलिए कीमत बढ़ने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। उनके बयान का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर खूब प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
महंगी चीनी हुई है पर चर्चे में कुछ और है!
पटना के बाजार में चीनी की कीमतों में अचानक उछाल ने त्योहारों से पहले घरों का बजट बिगाड़ दिया है। इसी बीच मीडिया से बातचीत में मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि लोग आजकल मिठाई - ओठाई कोन ही खाता हैं। उनका तर्क था कि बड़ी संख्या में लोग डायबिटीज से जूझ रहे हैं, इसलिए चीनी की कीमत बढ़ने से बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। यहीं से मामला कीमत से निकलकर बयान पर पहुंच गया।
आम आदमी का सवाल भी सीधा है, चीनी सिर्फ मिठाई में थोड़े ही जाती है। चाय से लेकर दूध, बेकरी आइटम, मिठाई और बाजार में बिकने वाले कई खाद्य पदार्थों की लागत इससे जुड़ी है। यानी चीनी कम खाने वाला व्यक्ति भी महंगाई का असर महसूस कर सकता है।
महंगाई का इलाज डायबिटीज है क्या?
मंत्री का बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने अपने-अपने अंदाज में प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी। मीम्स और तंज के जरिए यूजर्स ने सवाल उठाया कि महंगाई को समझाने के लिए लोगों की बीमारी को तर्क बनाना कितना उचित है। एक तरफ सरकार बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कदम उठा रही है, दूसरी तरफ मंत्री का यह बयान राजनीतिक बहस का नया मुद्दा बन गया है।
मंत्री के बयान पर विपक्षी नेताओं ने भी हमला बोला। निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने इसे लेकर सरकार पर निशाना साधा और कहा कि महंगाई पर जनता को राहत देने के बजाय इस तरह के तर्क दिए जा रहे हैं। RJD और कांग्रेस नेताओं ने भी बयान की आलोचना करते हुए कहा कि बढ़ती कीमतों का असर आम परिवारों पर पड़ रहा है और सरकार को इस पर गंभीरता से काम करना चाहिए। वहीं, NDA के भीतर से भी कीमतों को लेकर अलग सुर सुनाई दिए। मंत्रीविजय कुमार सिन्हा ने चीनी की बढ़ी कीमतों को गंभीरता से लेते हुए इसके कारणों की जांच की जरूरत बताई।
तो आखिर चीनी इतनी महंगी क्यों हो रही है?
बाजार की कहानी सिर्फ मंत्री के बयान तक सीमित नहीं है। चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे घरेलू सप्लाई, गन्ने के उत्पादन और घटते स्टॉक जैसी वजहें बताई जा रही हैं। त्योहारी सीजन से पहले मांग बढ़ने की आशंका ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। यानी चीनी की कीमत बढ़ने की वजह डायबिटीज नहीं, बल्कि बाजार में सप्लाई और मांग का गणित है।
बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने करीब एक दशक बाद 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। यह आयात 31 अक्टूबर 2026 तक किया जा सकेगा। सरकार का मकसद घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाकर कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा थोक उपभोक्ताओं के लिए चीनी के स्टॉक की सीमा भी तय की गई है, ताकि जमाखोरी के जरिए कीमतों को और बढ़ने से रोका जा सके।
चीनी की कीमतें बढ़ीं तो लोगों ने राहत की उम्मीद की। सरकार ने आयात और स्टॉक लिमिट जैसे कदम उठाए, लेकिन इस बीच मंत्री का ‘डायबिटीज’ वाला बयान पूरी बहस को एक अलग दिशा में ले गया। क्योंकि महंगाई का सवाल यह नहीं पूछता कि कोई मिठाई खाता है या नहीं। सवाल यह है कि घर चलाने वाला परिवार बढ़ती कीमतों के बीच अपना बजट कैसे संभाले। और फिलहाल जनता की नजर इसी पर है-चीनी की मिठास वापस बाजार में कब लौटेगी?

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