सिर से उठा मां-बाप का साया, कोई सरकारी लाभ नहीं, जन्म प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर पंचायत सेवक मांगते हैं 1000 रुपए
हजारीबाग जिले के केरेडारी प्रखंड से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने सरकारी दावों को खोखला साबित कर दिया है. यहां 12 साल का एक अनाथ बच्चा दर-दर की ठोकर खा रहा है लेकिन उसे मदद पहुंचाने के लिए कोई सरकारी बाबू नहीं पहुंचा.

Hazaribag / Jharkhand (Report By- Ashish Sinha): झारखंड में बेसहारा और अनाथ बच्चों के कल्याण, उच्च शिक्षा और भरण-पोषण के लिए सरकार कई महत्वपूर्ण योजनाएं चला रही है जिसका मुख्य उद्देश्य अनाथ और बेसहारा बच्चों को आर्थिक सुरक्षा और समाज में एक सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है. इतके साथ ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार अक्सर विकास का दावा करती है लेकिन हजारीबाग जिले से जो तस्वीर सामने आई है, उसने सरकारी मदद के दावों को खोखला साबित कर दिया है.
दर-दर की ठोकर खा रहा 12 साल का सुनील
मामला केरेडारी प्रखंड का है, जहां 12 साल का एक बेसहारा बच्चा मामूली मदद के लिए दर-दर की ठोकर खा रहा है. जानकारी के मुताबिक, बच्चे के माता-पिता की कुछ सालों पहले मौत हो गई है. जिसके बाद से वह दर-दर की ठोकर खाकर अपना जीवन यापन कर रहा है. बच्चे को अबतक न तो कोई सरकरी सुविधा मिल रही है और न ही उससे मिलने कोई सरकारी बाबू ही पहुंचा है.

जन्म प्रमाण पत्र के लिए 1000 मांग कर रहे पंचायत सचिव
आरोप है कि पंचायत सेवक ग्रामीणों से खुलेआम लूट मचा रहे हैं. जब गांव का कोई व्यक्ति जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए पंचायत भवन पहुंचता है तो पंचायत सेवकों द्वारा उनसे 1000 रुपए की डिमांड की जाती है. जिसके कारण कई लोगों का अबतक आधार कार्ड भी नहीं बन पाया है और इस वजह से वे सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित हैं. आपको बता दें, यह पूरी खबर केरेडारी प्रखंड अंतर्गत मनातू पंचायत के आखरी गांव फुसरी की है जहां फुसरी उत्क्रमित विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य ने आरोप लगाया है कि पंचायत सेवक ग्रामीणों से जन्म प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर लोगों से 1000-1000 रुपए की मांग करते हैं.
लोगों के घरों में काम कर पाल रहा अपना पेट
दरअसल, गांव में सुनील तिर्की नाम का एक 12 साल का बच्चा रहता है है जिसके सिर से माता और पिता दोनों का साया उठ चुका है. जिसके बाद से वह अपना पेट पालने के लिए दर-दर की ठोकर खा रहा हैं. वह लोगों के घरों में छोटा-मोटा काम करके और ईंट वाली गाड़ी में मजदूरी करके अपना जीवन-यापन कर रहा है. वहीं इस पूरे मामले में जब हमारे हजारीबाग के संवाददाता आशीष सिन्हा ने सच्चाई की तह तक जाने की कोशिश की तो एक के बाद एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ. जिसे सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे.

सुनील ने बताया- अब तक नहीं बना आधार कार्ड
जिस घर में सुनील रहता है वह आधा से अधिक टूट चुका है. घर पर उसके अलावा परिवार का कोई भी सदस्य नहीं है. एक 15 साल का बड़ा भाई है जो आर्थिक तंगी से परेशान होकर अन्य प्रदेश मजदूरी करने के लिए घर छोड़कर चला गया है और अब घर में 12 साल का सुनील तिर्की अकेले रह रहा है. मां की मौत एक सड़क हादसे में वर्ष 2023 में जबकि पिता की मौत 2024 में शराब पीने के बाद घर में जलकर मौत हुई है. सरकारी योजनाओं के बारे में पूछने पर सुनील ने बताया कि उसे कोई भी सरकारी योजनाओं की सुविधा उपलब्ध नहीं है. क्योंकि उसका अब तक आधार कार्ड भी नहीं बना है.
प्रभारी प्राचार्य ने किया चौंकाने वाला खुलासा !
सुनील का घर प्रखंड मुख्यालय से मात्र 14 से 15 किलोमीटर पर स्थित है बावजूद सरकारी बाबू इस ओर नजर नहीं पड़ी. सुनील को आस-पास के लोग मदद करते हैं. जब इस मामले में एक प्रभारी प्राचार्य से बात की गई तो उन्होंने बताया कि सुनील को क्यों और किस वजह से सरकारी सहायता नहीं मिल रही है. उन्होंने जो बातें बताई वह चौंकाने वाली थी. प्राचार्य ने बताया कि 12 वर्ष के उम्र में भी सुनील का आधार कार्ड नहीं बना है जिसके चलते उसे कोई भी सरकारी लाभ नहीं मिल पा रहा है चूंकि कोई भी सरकारी लाभ पाने के लिए आधार कार्ड होना बहुत जरूरी है. प्रभारी प्राचार्य शांति मिंज ने बताया कि सुनील के अलावा हमारे विद्यालय में करीब 54 बच्चे पढ़ते है जिनमें करीब 30 बच्चों का आधार कार्ड अब भी नहीं बना हुआ है.

जब इन बच्चों का आधार कार्ड बनवाने की बात हमने वहां के पंचायत सेवक के साथ अन्य लोगों से की, तो उन्होंने पहले जन्म प्रमाण पत्र बनाने को कहा. इतना ही नहीं जन्म प्रमाण पत्र बनाने के लिए पंचायत सेवकों द्वारा 1000 रुपए की मांग की जाती है उन्होंने बताया कि फूसरी गांव के लोग अत्यंत गरीब होने के कारण 1000 रुपए देने में असमर्थ हैं जिसके कारण न तो जन्म प्रमाण पत्र बन पाया है और न ही आधार कार्ड.
विकास की बातें करने वाले कभी नहीं जाते ग्राउंड जीरो !
अब सवाल ये उठता है कि विकास की बात करने वाले लोग कहां हैं जो सुनील तिर्की जैसे बच्चे को लाभ नहीं दिला पा रहे हैं और 1000 रुपए मांगने वाले अधिकारी पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती है. हमारा सवाल उन लोगों से भी है जो विकास की बातें तो कहते हैं लेकिन ग्राउंड जीरो में कभी नहीं जाते. और वहां की हकीकत से सामना नहीं करते, ऐसे में हम कह सकते हैं कि ये केवल सुनील तिर्की जैसे बच्चों की कहानी नहीं है बल्कि उसके जैसे कई और कहानी होगी. जिसे हमें जानने की जरूरत है.
इस संबंध में हमारे संवाददाता ने कहा कि सरकार, जिला प्रशासन और स्थानीय जन प्रतिनिधि को जगाने की जरूरत है ताकि सरकारी लाभ सीधे लोगों को मिल पाए तथा जन्म प्रमाण पत्र बनाने पर पैसे मांगने वाले जैसे पंचायत सेवक पर कड़ी कार्रवाई हो सके. वहीं इस मामले पर हजारीबाग जेएमएम के वरिष्ठ नेता रामा सोनी ने संज्ञान में लेते हुए केरेडारी के BDO से संपर्क किया इस दौरान उन्होंने बच्चे का आधार कार्ड बनवाने और क्षेत्र में विकास करने की बात कही.
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