उदयपुर की झीलों पर हाईकोर्ट सख्त, नए निर्माण और अतिक्रमण पर तत्काल रोक
उदयपुर की झीलों पर हाईकोर्ट सख्त, नए निर्माण और अतिक्रमण पर तत्काल रोक


राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने उदयपुर की झीलों और दूसरे जल निकायों को लेकर एकदम सख्त रुख अपना लिया है, और यहीं से स्वतः संज्ञान भी ले लिया। कोर्ट का कहना है कि झीलों, तालाबों, नहरों और कैचमेंट क्षेत्रों में लगातार बढ़ता प्रदूषण, अतिक्रमण साथ ही अनियंत्रित निर्माण वाली गतिविधियाँ, सब मिलकर स्थिति को बिगाड़ रही हैं। इसी संदर्भ में जनहित याचिका की भी एंट्री कर दी गई है, और अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को तय कर दी गई है। न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति रेखा बोराणा की अवकाशकालीन खंडपीठ ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए उदयपुर की झीलों और संवेदनशील हिस्सों में किसी भी नए निर्माण, या फिर भौतिक बदलाव पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अदालत ने खास तौर पर मदार नहर और रूपसागर तालाब जैसे इलाकों के संरक्षण को, काफी अहम बताया ।
खंडपीठ ने जिला प्रशासन, नगर निकायों और संबंधित विभागों से विस्तृत रिपोर्ट मंगाई है। रिपोर्ट में झीलों की मौजूदा हालत क्या है, अतिक्रमण कितना है, प्रदूषण के स्रोत कौनसे हैं, अवैध निर्माण और जो संरक्षण के लिए कदम उठाए गए—उनकी साफ जानकारी देने को कहा गया है। हाईकोर्ट ने साफ तौर पर इशारा किया है कि उदयपुर की प्राकृतिक जल विरासत को लेकर किसी तरह का समझौता, स्वीकार नहीं होगा। अदालत के मुताबिक झीलों को बचाना सिर्फ पर्यावरण के हित में नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन वाली अर्थव्यवस्था के लिए भी जरूरी है। कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल काफी तेज हो गई है, और आने वाले दिनों में कई निर्माण परियोजनाओं और अतिक्रमण मामलों की जांच, तेज किए जाने के संकेत मिल रहे हैं।

specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.
Related Posts

BJP छोड़ अन्नामलाई के साथ आए अमर प्रसाद रेड्डी, तमिलनाडु की राजनीति में बढ़ी हलचल

मोदी सरकार के 12 साल और 6 विवादित फैसले, जिस दौरान जमकर हुए विरोध और हंगामे







