झारखंड के पूर्व सीएम नहीं कर सके सम्मेद शिखर में पूजा-अर्चना, ताला बंद करने पर BDO पर जमकर भड़के
गिरिडीह के मधुबन में पीरटांड़ बीडीओ ने बाबूलाल मरांडी को सम्मेद शिखर के प्रवेश द्वार पर पूजा करने की अनुमति नहीं दी. जब पूर्व सीएम उक्त स्थान पर पहुंचे तो उन्हें ताला बंद मिला. बारंबार फोन करने के बावजूद बीडीओ की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली.

Giridih, Jharkhand: दो दिवसीय प्रशिक्षण अभियान में शामिल होने गिरिडीह के मधुबन पहुंचे भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी को भारी फजीहत उठानी पड़ी. दरअसल, मधुबन के पारसनाथ पहाड़ में जैन समाज के 22 तीर्थंकरों के साथ आदिवासी समुदाय के सर्वोच्च आराध्य मरांग बुरु के पूजन स्थल दिशोंम मांझी थान स्थापित हैं. लिहाजा, भाजपा के ट्रेनिंग में शामिल होने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने दिशोम मांझी थान पहुंच कर मरांग बुरु ने पूजा अर्चना करने की पहल की. लेकिन पीरटांड़ प्रखंड विकास पदाधिकारी मनोज मरांडी इसके विरोध में खड़े थे.
प्रखंड विकास पदाधिकारी ने दिशोम मांझी थान में पहले से ताला लगाकर चाभी अपने पास रखा हुआ था. इस दौरान कई बार उन्हें सूचना दी गई. बताया जा रहा है कि उक्त पदाधिकारी को कई बार कॉल किया गया, जिसका उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. लिहाजा, पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने बीडीओ को हिटलर बताते हुए कहा कि बीडीओ को चाभी किसने रखने का अधिकार दिया है.
बाबूलाल मरांडी ने खुद को आदिवासी नेता बताते हुए भी इसकी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि उन्हें यहां पूजा करने की अनुमति न दिया जाना सर्वथा अनुचित है. उन्होंने कहा कि एक सामान्य बीडीओ द्वारा उन्हें अपने आराध्य की पूजा-अर्चना से रोका जाना स्वीकार करने योग्य नहीं है.
पूर्व मुख्यमंत्री ने पीरटांड़ बीडीओ को जेएमएम का कार्यकर् बताते हुए मनमानी करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि स्थानीय आदिवासी समुदाय को इसे लेकर विरोध करने की जरूरत है. आदिवासी समुदाय इस पूजन स्थल के लिए एक पुजारी नायके की नियुक्ति करें. जिसके बाद ही यहां निरंतर पूजा की जा सकेगी.
(गिरिडीह से मनोज कुमार पिंटू की रिपोर्ट)
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