अंश-अंशिका की बरामदगी के बाद राजनीतिक सियासत फिर हुई शुरू, पक्ष और विपक्ष हुए आमने-सामने
पिछले 13 दिनों से लापता अंश-अंशिका को बरामद तो हो गए है लेकिन मामले को लेकर राजनीतिक सियासत एक फिर से शुरू हो गई है. वहीं मामले में झारखंड पुलिस मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर दोनों बच्चों को उसके परिजनों को सौंपा गया.

Ranchi News: राजधानी रांची के धुर्वा स्थित मौसीबाड़ी से लापता 2 सगे भाई-बहन अंश और अंशिका को रांची पुलिस ने ढूंढ निकाला. रामगढ़ जिले के चितरपुर से पुलिस ने दोनों की सकुशल बरामदगी की है. और दो लोगों को मामले में गिरफ्तार किया है. अंश-अंशिका की सही सलामत बरामद होने के बाद रांची और झारखंड पुलिस की लोग सराहना कर रहे है. पिछले 13 दिनों से लापता अंश-अंशिका को बरामद तो हो गए है लेकिन मामले को लेकर राजनीतिक सियासत एक फिर से शुरू हो गई है. वहीं मामले में झारखंड पुलिस मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर दोनों बच्चों को उसके परिजनों को सौंपा गया. 
मामले में डीजीपी तदाशा मिश्रा ने की प्रेस वार्ता
झारखंड पुलिस कार्यालय में प्रेस वार्ता करते हुए डीजीपी तदाशा मिश्रा ने बताया कि अंश-अंशिका लापता मामले में बड़े पैमाने पर छापेमारी की गई. सभी जगहों पर पोस्टर लगाया गया और रिवॉर्ड भी घोषित किया गया था. उन्होंने मीडिया को भी धन्यवाद दिया और कहा कि मामले में लगातार कवरेज की वजह से दोनों बच्चों को दूर तक नहीं ले जाया जा सका. डीजीपी तदाशा मिश्रा ने पुलिस टीम को भी और शुभकामनाएं दी. उन्होंने बताया कि इस मामले में फिलहाल बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज की जांच की जा रही है. वहीं, एडीजी मनोज कौशिक ने अपने बयान में कहा कि यह काम अंतर्राज्यीय गिरोह का है. लापता और अगवा बच्चों को ध्यान में रखते हुए अगवा किए जाने की वजह को गोपनीय रखा गया. 
आमने-सामने हुए पक्ष और विपक्ष
हालांकि, मामले में राजनीतिक गलियारों में सियासत तो तब भी थी जब बच्चों की सकुशल बरामदगी नहीं हुई थी लेकिन अब दोनों के सही सलामत मिलने के बाद बीजेपी ने दावा किया है कि बच्चों को पुलिस ने नहीं बल्कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने ढूंढा है. बता दें, यह दावा झारखंड बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता अजय नाथ शाहदेव ने किया है. जबकि सत्तारूढ़ दल JMM के प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि बीजेपी पुलिस का मनोबल तोड़ने का काम कर रही है. उन्होंने कहा कि बीजेपी की ओर से पुलिस द्वारा चलाए जा रहे मुहिम को बाधित करने का कार्य किया जा रहा है. 
अंश-अंशिका बरामदगी में पुलिस नहीं बजरंग दल का अहम रोल- BJP
बीजेपी प्रवक्ता अजय नाथ शाह ने कहा कि धुर्वा से लापता अंश-अंशिका को पुलिस ने नहीं बल्कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा ढूंढा गया है. इस मामले में पुलिस से ज्यादा बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने अहम रोल निभाया है. उन्होंने कहा कि दोनों बच्चों को बजरंग दल द्वारा खोजा गया और इसके बाद पुलिस को इसकी जानकारी दी गई. अजय नाथ शाह ने कहा कि इससे पहले भी धुर्वा में कई बच्चे लापता हुए हैं. जिसका आज तक कोई पता नहीं है. अंश-अंशिका मामले में पुलिस काफी प्रेशर में थी और बीजेपी का दबाव ने काम किया है. रामगढ़ में बच्चों को बरामद किया गया है यहां सबसे सक्रिय रोल बजरंग दल का है. लेकिन पुलिस वाहवाही लूटने का कार्य कर रही है. उन्होंने कहा कि रांची और झारखंड की पुलिस को सतर्क होने की जरूरत है क्योंकि बच्चे ही नहीं बल्कि हर जगह क्राइम का बोल-बाला है. 
अंश-अंशिका मामले में BJP ने पुलिस मनोबल तोड़ा- JMM
वहीं, इस पूरे मामले में JMM (झारखंड मुक्ति मोर्चा) के प्रवक्ता मनोज पांडे ने पुलिस को दी है. उन्होंने कहा कि अंश-अंशिका की सकुशल बरामदगी के लिए पुलिस प्रशासन को हो लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अलोचना होनी चाहिए. क्योंकि बीजेपी ने पुलिस प्रशासन का मनोबल तोड़ने का काम किया है उन्होंने कहा कि बार-बार पुलिस द्वारा अभियान चलाए जा रहे मुहिम को बाधित करने का काम किया है. राज्य सरकार और रांची जिला पुलिस की जितनी तारीफ की जाए कम है. लेकिन विपक्षी दलों की जितनी अलोचना की जाए वह भी कम है.
जिस तरीके से पुलिस के कामकाज में इन्होंने व्यवधान डाला. पुलिस को डायवर्ट किया. पुलिस के हौसला और मनोबल को गिराने का कार्य किया लेकिन अंततः पुलिस प्रशासन ने बुद्धिमत्ता और जांबाजी का परिचय देते हुए दोनों बच्चे की सकुशल बरामदगी की है. इसके लिए पुलिस प्रशासन को बहुत . लेकिन विपक्षयों को सलाह है कि एकाद-बार वे देहरादुन चले जाएं...अंकिता भंडारी जिसमें इन्हीं के नेताओं के नाम है. उसके लिए भी जाकर धरना प्रदर्शन कर दें. केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी से विशेष रुप से आग्रह है कि वे वहां जाएं. आपकी सरकार में दुराचारी, बलत्कारी जेल से बाहर और सोनम वांगचुक जैसे लोग जेल में डाले जाते है. जिस घटना पर राजनीति की जा रही थी वो दोनों बच्चे आज सकुशल वापस आ गए हैं.यह पुलिस प्रशासन की देन है. और इसी पुलिस प्रशासन के खिलाफ वे पुतला फूंक रहे थे. ये तो शर्म की बात है.
रिपोर्ट- नवीन शर्मा









