मंदिर के चबूतरे पर चल रहा स्कूल, गायब मिली शिक्षिका, अरवल में शिक्षा व्यवस्था की खुली पोल
बिहार के अरवल में एक स्कूल की व्यवस्था मंदिर प्रांगण में की गई है, न स्कूल भवन है, न पर्याप्त शिक्षक. पढ़ाने के लिए चार शिक्षक पदस्थापित हैं, लेकिन सभी गायब. यह वाकिया बिहार में शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलता नजर आता है.

Bihar (Arwal): एक ओर सरकार शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों की सच्चाई बयां कर रही है. अरवल प्रखंड क्षेत्र के दिरपाल विगहा स्थित नवसृजित प्राथमिक विद्यालय इसका ताजा उदाहरण है, जहां विद्यालय भवन के अभाव में बच्चों की पढ़ाई मंदिर के चबूतरे पर कराई जा रही है.

यह दृश्य न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि सरकारी दावों की पोल भी खोलती नजर आती है. विद्यालय के प्राचार्य जगन्नाथ खत्री ने बताया कि नामांकन पंजी में कुल 49 छात्रों का नाम दर्ज है और उन्हें पढ़ाने के लिए 4 शिक्षक पदस्थापित हैं.
बावजूद इसके, भवन के अभाव में बच्चों को उचित शिक्षा उपलब्ध कराना बेहद मुश्किल हो गया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे. अब सवाल यह उठता है कि जब स्कूल के लिए भवन तक उपलब्ध नहीं है और शिक्षक भी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं, तो आखिर शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के सरकारी दावे कितने सार्थक हैं.
रिपोर्ट: निशान्त मिश्रा
specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.
Related Posts

Barh में हंसी-मजाक में युवक ने अपने दोस्त को मारी गली, गंभीर हालत में PMCH रेफर

स्कॉर्पियो की चपेट में आए 3 बच्चों में से 1 की इलाज के दौरान मौत, 2 की हालत नाजुक






