Assam Election Result: असम में शून्य पर सिमटकर रह गई JMM, काम न आया कांग्रेस से अलगाव, कहां रह गई कमी?
असम चुनाव में पूरी झारखंड कैबिनेट ने कैंपेनिंग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी. सीएम हेमंत सोरेन खुद विधानसभा क्षेत्रों में जाकर जनता को लुभाने का प्रयत्न करते रहे. शून्य सीट पर अटक कर रह जाने वाली जेएमएम से गलती कहां हुई इस पर चर्चा करते हैं.

Assam Election Result: असम विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की राष्ट्रीय विस्तार की उम्मीदों को करारा झटका दिया है. झारखंड में सत्तासीन रहने के बावजूद, असम के चाय बागान क्षेत्रों और आदिवासी बहुल सीटों पर पार्टी का जादू नहीं चल पाया. विशेष रूप से गोसाईगांव सीट पर, जहां पार्टी ने काफी उम्मीदें लगाई थीं, वहां के प्रत्याशी फेड्रिक्सन हांसदा मुख्य मुकाबले में अपनी जगह नहीं बना सके.
गोसाईगांव की स्थिति
रुझानों के अनुसार, गोसाईगांव में मुकाबला मुख्य रूप से BPF, AIUDF और कांग्रेस के बीच सिमट गया है.
मजेंद्र नरजरी (BPF): ~45,517 वोट (बढ़त बनाए हुए)
रवि शंकर कासिरेड्डी (AIUDF): ~39,476 वोट
झामुमो (JMM): वोटों की गिनती में काफी पीछे (अन्य के श्रेणी में)
कैंपेनिंग में कहां रह गई कमी?
संगठनात्मक ढांचे का अभाव
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, JMM के पास असम में कैडर आधारित जमीन तैयार नहीं थी. पार्टी ने केवल चुनाव के समय अपने उम्मीदवार उतारे, जबकि स्थानीय स्तर पर बूथ मैनेजमेंट और कार्यकर्ताओं की फौज की भारी कमी देखी गई.
वोटों का बिखराव
कांग्रेस के साथ गठबंधन न हो पाना JMM के लिए आत्मघाती साबित हुआ. कांग्रेस ने JMM को 5-7 सीटों का प्रस्ताव दिया था, लेकिन JMM ने 21 सीटों पर अकेले लड़ने का फैसला किया. इसका नतीजा यह हुआ कि आदिवासी और चाय जनजाति के वोट कांग्रेस, BJP और JMM के बीच बंट गए, जिससे किसी एक को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल सका.
स्थानीय बनाम बाहरी नेतृत्व
हेमंत सोरेन और अन्य बड़े नेताओं की रैलियों में भीड़ तो जुटी (विशेष रूप से उनके हेलीकॉप्टर को देखने के लिए), लेकिन वह भीड़ वोटों में तब्दील नहीं हो पाई. स्थानीय जनता ने उन क्षेत्रीय दलों (जैसे BPF और UPPL) पर अधिक भरोसा दिखाया जो साल भर उनके बीच रहते हैं.
मुद्दों की अस्पष्टता
JMM का पूरा कैंपेन 'झारखंडी जड़ों' और 'वंशानुगत पहचान' पर टिका था, जबकि असम के मतदाता इस बार विकास (Orunodoi scheme), CAA-NRC और स्थानीय रोजगार जैसे ठोस मुद्दों पर मतदान कर रहे थे.
सीमित संसाधन और देरी से शुरुआत
चुनाव से ठीक पहले गठबंधन टूटना और फिर आनन-फानन में प्रत्याशियों की घोषणा ने JMM को प्रचार के लिए बहुत कम समय दिया. बड़े गठबंधन (NDA और महाजोत) के मुकाबले JMM का प्रचार काफी कमजोर रहा.
झामुमो के लिए असम 2026 के नतीजे एक कड़ा सबक हैं. बिना मजबूत स्थानीय संगठन और स्पष्ट क्षेत्रीय रणनीति के, केवल 'झारखंड मॉडल' के सहारे असम की जटिल राजनीति में पैठ बनाना लगभग असंभव साबित हुआ है. फिलहाल, गोसाईगांव सहित सभी 21 सीटों पर पार्टी का सूपड़ा साफ होता नजर आ रहा है.
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