सम्मेद शिखर में दिन भर लगा रहा यात्रियों का तांता, कुछ ने कहा "हालात नहीं हैं पहले की तरह"
नए साल के पहले दिन गिरिडीह में जैन समाज के तीर्थस्थल सम्मेद शिखर मधुबन में उमड़ी भीड़. वंदना कर लौट रहे तीर्थयात्रियों ने Naxatra News से पारसनाथ पहाड़ी भ्रमण से जुड़े कुछ अच्छे कुछ खराब अनुभवों को साझा किया. कहा जैन समाज के तीर्थस्थल को लोग कर रहे है अपिवत्र, प्रशासन पर भी ध्यान नहीं देने का आरोप लगाया.

JHARKHAND (GIRIDIH): नए साल का स्वागत लोगों ने अपने अपने अंदाज के साथ किया. किसी ने पिकनिक स्पॉट का रुख किया. कई ऐसे भी थे, जो सुबह से भगवान की वंदना में जुटे थे.
लिहाजा, Naxatra News साल के पहले दिन गिरिडीह में जैन समाज के सर्वोच्च तीर्थस्थल सम्मेद शिखर मधुबन पहुंचा और जानने का प्रयास किया कि नए साल में यहां आए तीर्थयात्रियों की तादाद क्या है!

इस दौरान सम्मेद शिखर मधुबन के पारसनाथ पर्वत के अलग अलग हिस्सों में विराजमान 20 तीर्थकंरो की वंदना के लिए राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, मुंबई समेत बिहार और झारखंड के कई जिलों से आए तीर्थयात्रियों का सैलाब उमड़ा दिखा. सम्मेद शिखर मधुबन के कई संस्थाओं बीसपंथी कोठी, तेरहपंथी कोठी, भोमियाजी भवन, गुणायातन ऐसे कई दर्जन भर से अधिक संस्था की धर्मशालाएं पूरी तरह से भर गई थी.

मधुबन के बाजार में पांव रखने की भी जगह नहीं थी. तीर्थयात्रियों ने वंदना के बाद मधुबन के तलहटी में साल के पहले दिन हर मंदिर में भगवान महावीर के साथ भगवान पार्सवनाथ का दर्शन और पूजा अर्चना किया.
भक्तों की भीड़ को देखते हुए ही खुद एसडीपीओ सुमित प्रसाद के साथ मधुबन थाना प्रभारी पुलिस जवानों के साथ अलर्ट पर दिखे. पर्वत पर आने जाने वाले हर व्यक्ति की जांच की जा रही थी.
इस दौरान Naxatra News ने पर्वत से वंदना कर निचे उतर रहे कई भक्तों से बात किया. मध्य प्रदेश के दमोह से आई प्रीति जैन ने कहा कि पहले का महौल कुछ और था, पर्वत साफ और स्वच्छ रहता था. छेड़खानी नही हुआ करती थी, लेकिन पिछले तीन सालों से ये सब होता दिख रहा है. जिसे रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा कई जरुरी कदम उठाये जाने जरुरी हैं.
इस दौरान राजस्थान से अपने पिता और रिस्तेदार के साथ आई श्रीति जैन ने कहा कि साल के पहले दिन युवाओं को ईश्वर वंदना जरुर करनी चाहिए. इससे मन में शांति बनी रहती है.
रिपोर्ट: मनोज कुमार पिंटू









