नालंदा सदर अस्पताल में मासूम की मौत पर बवाल! ICU-इमरजेंसी में तोड़फोड़, डॉक्टरों को दौड़ाने का आरोप
नालंदा सदर अस्पताल में तीन वर्षीय बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा और तोड़फोड़ की। डॉक्टरों पर हमले के आरोप के बाद स्वास्थ्यकर्मियों ने कार्य बहिष्कार किया। पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया है।


नालंदा: सदर अस्पताल में तीन वर्षीय बच्चे की इलाज के दौरान मौत के बाद बुधवार को जमकर हंगामा हुआ। आक्रोशित परिजनों और उनके समर्थकों पर अस्पताल के ICU, इमरजेंसी और SNCU वार्ड में घुसकर तोड़फोड़ करने का आरोप लगा है। स्वास्थ्यकर्मियों का दावा है कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों को जान से मारने की धमकी देते हुए दौड़ाया गया और उनके साथ मारपीट की कोशिश की गई। महिला स्वास्थ्यकर्मियों से गाली-गलौज और बदसलूकी का भी आरोप है।
घटना के विरोध में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने कार्य बहिष्कार कर दिया, जिसका असर अस्पताल की चिकित्सा सेवाओं पर पड़ा। पर्ची काउंटर समेत कई सेवाएं प्रभावित होने से इलाज के लिए पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था बच्चा
मामला सोहसराय थाना क्षेत्र के छोटी पहाड़ी निवासी गुड्डू राम के तीन वर्षीय बेटे गौरव कुमार की मौत से जुड़ा है। स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार, बच्चे को रात करीब 11 से 12 बजे के बीच गंभीर डायरिया और सांस लेने में भारी परेशानी की स्थिति में अस्पताल लाया गया था। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि बच्चे को तत्काल प्राथमिक उपचार दिया गया और आईवी सलाइन चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन उसकी हालत बेहद गंभीर थी। इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई।
परिजनों ने लगाया इलाज में देरी का आरोप
दूसरी ओर, मृतक के चाचा शंकर कुमार समेत परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि बच्चे को दोपहर से उल्टी और दस्त की शिकायत थी और रात में हालत बिगड़ने पर उसे सदर अस्पताल लाया गया। परिजनों का आरोप है कि इमरजेंसी पहुंचने के बाद तत्काल इलाज शुरू करने के बजाय पहले पर्ची कटवाने को कहा गया। उनका दावा है कि बच्चे की मां उसे गोद में लेकर मदद की गुहार लगाती रही। बाद में बच्चे को शिशु वार्ड और फिर ICU ले जाया गया, जहां ऑक्सीजन दी गई, लेकिन कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही से किया इनकार
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक सह प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. राजीव रंजन ने इलाज में लापरवाही के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि बच्चा कई दिनों से बीमार था और घर पर उसका इलाज चल रहा था। अस्पताल पहुंचने के समय उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर थी। उन्होंने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि अस्पताल में तैनात होमगार्ड और निजी सुरक्षाकर्मी स्थिति को नियंत्रित करने में प्रभावी भूमिका नहीं निभा सके।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और डॉक्टरों पर हमला करने के मामले में गैर-जमानती धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को हिरासत में लिया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
कार्य बहिष्कार से मरीज परेशान
डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के कार्य बहिष्कार का असर इलाज कराने पहुंचे मरीजों पर भी पड़ा। पर्ची काउंटर बंद रहने से दूर-दराज से आए मरीज परेशान रहे। कुछ मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा।सड़क दुर्घटना में घायल एक मरीज के परिजन भी इलाज के लिए इमरजेंसी पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण उन्हें निजी अस्पताल जाना पड़ा।
फिलहाल स्वास्थ्यकर्मी सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था और उपद्रव में शामिल लोगों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हैं। वहीं, बच्चे की मौत को लेकर परिजनों द्वारा लगाए गए लापरवाही के आरोप और अस्पताल प्रशासन के दावे के बीच मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि इलाज में लापरवाही हुई या बच्चे की गंभीर स्थिति के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
(नालंदा से वीरेंद्र कुमार की रिपोर्ट)

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