संविधान निर्माता बाबा भीमराव अंबेडकर की 135व जयंती आज, जानें उनके 10 विचार जो बदल देंगे आपकी जिंदगी
महान अर्थशास्त्री बाबा भीम राव अंबेडकर की आज 135वीं जयंती है. इसे आज पूरा भारत देश बेहद ही सम्मान, श्रद्धा और उत्साह के साथ मना रहा है. बाबा भीम राव अंबेडकर को आज देशभर के दिग्गज नेता और लोग उनकी स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहे हैं.

Ambedkar Jayanti 2026: भारतीय संविधान के निर्माता, समाज सुधारक और महान अर्थशास्त्री बाबा भीम राव अंबेडकर की आज 135वीं जयंती है. इसे आज पूरा भारत देश बेहद ही सम्मान, श्रद्धा और उत्साह के साथ मना रहा है. बाबा भीम राव अंबेडकर को आज देशभर के दिग्गज नेता और लोग उनकी स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहे हैं.
मध्यप्रदेश के महू में एक दलित परिवार में हुआ था जन्म
आजाद भारत के पहले कानून मंत्री रहे डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में एक दलित परिवार में हुआ था. उन्होंने अपना पूरा जीवन शोषितों, दलितों और पिछड़ों को उनका हक अधिकारी दिलाने के लिए संघर्ष किया, उनकी समानता, स्वतंत्रता और अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी. शिक्षा के लिए लोगों को जागरूक किया. अंबेडकर ने हमेशा से महिलाओं और मजदूर वर्ग के लोगों का समर्थन करते किया.
एक दलित परिवार में जन्म लेने के कारण उन्होंने खुद अपने पूरे जीवन में भेदभाव, छूआछुत और असमानता का सामना किया है. लेकिन बाबा साहब आगे चलकर इन सबके खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की और भारतीय समाज को एक नई दिशा प्रदान की. उन्होंने हिंसा या अहिंसा का मार्ग अपनाने के बजाय अपने कलम और शिक्षा को जीवन का ढाल बनाकर समाज में परिवर्तन लाने का कार्य किया.
बाबा भीमराव अंबेडकर का केवल एक ही मूलमंत्र था, वो था...'शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो' बाबा भीमराव अक्सर कहा करते ते कि खुद को शिक्षित करो क्योंकि शिक्षा ही प्रगति की रीढ़ है. मैं मूर्तियों में नहीं किताबों में हूं. मुझे पूजने नहीं बल्कि पढ़ने की आवश्यकता है.’ उनके विचारों में शिक्षा और ज्ञान का महत्व समाहित है. इसी लिए तो उनके विचार आज भी समाज को नई दिशा प्रदान करते हैं.
जानें बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के 10 अच्छे विचार
‘मंदिर जाने वाले लोगों की लंबी कतारें जिस दिन पुस्तकालय की ओर बढ़ेगी, उस दिन देश को महाशक्ति बनने से कोई रोक नही सकता.’
‘तुम्हारे पैरों में जूते भले ना हों, हाथों में किताब जरूर होनी चाहिए.’
‘सफलता कभी पक्की नहीं होती है और असफलता भी अंतिम नहीं होती है. इसलिए अपनी कोशिश तब तक जारी रखो जब तक आपकी जीत इतिहास ना बन जाए.’
‘लोकतंत्र केवल सरकार का एक रूप नहीं, यह मुख्य रूप से संयुक्त संचारित अनुभव का एक तरीका है.’
‘अगर आप में गलत को गलत कहने की क्षमता नही है, तो आपकी प्रतिभा व्यर्थ है. शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो.’
‘मनुष्य का अंतिम लक्ष्य ज्ञान का विकास होना चाहिए.’
‘मैं किसी समुदाय की प्रगति का आकलन इस आधार पर करता हूँ कि महिलाओं ने कितनी प्रगति हासिल की है.’
‘मैं उस धर्म को नहीं मानता जो मनुष्य को मनुष्य से अलग करता हो.'
’जीवन लंबा होने के बजाय महान होना चाहिए.’
‘जो लोग अपने इतिहास को भूल जाते हैं, वे कभी नया इतिहास नहीं बना सकते.’
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