दरभंगा राजघराने की आखिरी महारानी कामसुंदरी देवी का निधन, मिथिलांचल में शोक की लहर
1940 के दशक में महारानी कामसुंदरी देवी का विवाह महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंह से हुआ था, जो दरभंगा रियासत के अंतिम शासक थे. महाराजा की दो अन्य पत्नियों के निधन के बाद...

BIHAR (DARBHANGA): मिथिला की सांस्कृतिक विरासत की संरक्षक और दरभंगा राजघराने की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी का 94 वर्ष में निधन हो गया. सोमवार अहले सुबह करीब तीन बजे राज परिसर स्थित ‘कल्याणी निवास’ में उन्होंने अंतिम सांस ली. वे पिछले कुछ समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं. उनके निधन से पूरे दरभंगा में शोक की लहर दौड़ गई है.

पौत्र कुमार रत्नेश्वर सिंह देंगे मुखाग्नि
महारानी के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार आज राज परिसर स्थित माधेश्वर परिसर के श्यामा माई मंदिर प्रांगण में किया जाएगा. अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. परंपरा के अनुसार महारानी को मुखाग्नि उनके पौत्र कुमार रत्नेश्वर सिंह देंगे.

अंतिम दर्शन के लिए आवास पहुंच रहे लोग
महारानी के अंतिम दर्शन के लिए राजपरिवार के सदस्य, शुभचिंतक और बड़ी संख्या में दरभंगा वासी उनके आवास पर पहुंच रहे हैं. आम लोगों के साथ-साथ सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों ने भी शोक संवेदना व्यक्त की है.
पूरे मिथिला क्षेत्र में शोक की लहर
दरभंगा के इतिहास और राजपरंपरा से गहराई से जुड़ी महारानी के निधन को अपूरणीय क्षति माना जा रहा है. उनके निधन से न केवल राजपरिवार बल्कि बिहार के राजनीतिक व सामाजिक क्षेत्रों और पूरे मिथिला क्षेत्र में शोक का माहौल है.

महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंह से हुआ था विवाह
1940 के दशक में महारानी कामसुंदरी देवी का विवाह महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंह से हुआ था, जो दरभंगा रियासत के अंतिम शासक थे. महाराजा की दो अन्य पत्नियों के निधन के बाद, कामसुंदरी देवी ने ही राजघराने की परंपराओं को आगे बढ़ाया. 1962 में महाराजा के निधन के बाद, उन्होंने न केवल परिवार को संभाला बल्कि राजघराने से जुड़ी ऐतिहासिक और कानूनी चुनौतियों का भी डटकर सामना किया.
रिपोर्ट : लक्ष्मण कुमार









