‘मौत की रस्सी’ बनाने वाले हाथ अब बुन रहे रिश्तों की डोर, देखिए ये अद्भुत नज़ारा!
बक्सर केंद्रीय कारा में बंद सजायाफ्ता बंदी इस रक्षाबंधन पर राखियां तैयार कर रहे हैं। जेल के मुख्य द्वार स्थित ‘मुक्ति बाजार’ में ये राखियां 10 से 20 रुपये में बिक रही हैं। खास बात यह है कि बक्सर जेल फांसी की रस्सी बनाने के लिए भी जाना जाता है।


बक्सर: बक्सर केंद्रीय कारा में इन दिनों लोहे की सलाखों के पीछे एक अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है। जिन हाथों से कभी फांसी की रस्सी तैयार की जाती है, उन्हीं हाथों से अब भाई-बहन के रिश्ते की डोर यानी खूबसूरत राखियां तैयार की जा रही हैं। रक्षाबंधन को देखते हुए केंद्रीय कारा में बंद सजायाफ्ता बंदी राखियां तैयार कर रहे हैं। इन राखियों को जेल के मुख्य द्वार पर बिहार सरकार की ओर से संचालित ‘मुक्ति बाजार’ में बिक्री के लिए रखा गया है।
मुक्ति बाजार में बंदियों द्वारा तैयार की गई राखियों की कीमत महज 10 से 20 रुपये रखी गई है। बाजार की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध इन राखियों को लेकर लोगों में भी दिलचस्पी देखने को मिल रही है। यह पहल सिर्फ राखी बेचने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य जेल में बंदियों को कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाना, उनके हुनर को रोजगार से जोड़ना और उनके परिवारों को आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना है।
बक्सर जेल की पहचान फांसी की रस्सी से भी
बक्सर केंद्रीय कारा की एक खास पहचान फांसी की रस्सी तैयार करने को लेकर भी रही है। देश की विभिन्न जेलों में फांसी के लिए इस्तेमाल होने वाली रस्सी के निर्माण और आपूर्ति का काम बक्सर केंद्रीय कारा से जुड़े होने की जानकारी सामने आती रही है।
सजा के साथ हुनर और सुधार की राह
मुक्ति बाजार जैसी पहल का मकसद बंदियों को जेल से बाहर निकलने के बाद बेहतर जीवन के लिए तैयार करना भी है। अलग-अलग वस्तुओं के निर्माण के जरिए उन्हें काम सीखने और अपनी क्षमता विकसित करने का अवसर मिलता है। रक्षाबंधन के मौके पर तैयार की जा रही ये राखियां इसी प्रयास का हिस्सा हैं। जेल प्रशासन और सरकार की यह पहल बंदियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है।

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