'गर्व से कहो हम आदिवासी हैं', दुमका में झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026 का शानदार आगाज
दुमका में विश्व आदिवासी दिवस पर झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026 का शुभारंभ हुआ। सांसद नलिन सोरेन ने आदिवासी पहचान पर गर्व करने का संदेश दिया। लोकगीत, नृत्य और सरकारी योजनाओं से कार्यक्रम खास रहा।

Dumka News: विश्व आदिवासी दिवस के खास मौके पर दुमका पूरी तरह से अपने सांस्कृतिक रंगों में रंगा नजर आया। शहर के कन्वेंशन सेंटर में झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026 का बेहद शानदार तरीके से उद्घाटन किया गया। दुमका के सांसद नलिन सोरेन समेत कई खास मेहमानों ने दीप जलाकर इस भव्य कार्यक्रम की शुरुआत की। इस महोत्सव का मुख्य मकसद सिर्फ जश्न मनाना नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की अनमोल संस्कृति, भाषा और विरासत को सहेजना और आज की नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से मजबूती से जोड़ना है।
अपनी पहचान को लेकर मन में न रखें कोई हीन भावना: सांसद नलिन सोरेन
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे दुमका सांसद नलिन सोरेन ने अपने दमदार संबोधन से वहां मौजूद सबका दिल जीत लिया। उन्होंने युवाओं में जोश भरते हुए कहा कि हमें अपनी आदिवासी पहचान पर पूरा फख्र होना चाहिए और इसे लेकर मन में कभी भी कोई हीन भावना नहीं लानी चाहिए। शान से कहिए कि हम आदिवासी हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आदिवासी समाज की असली पहचान उसकी समृद्ध भाषा, लोक परंपराओं और प्रकृति से जुड़ी सादगी भरी जीवनशैली है। सांसद ने साफ लफ्जों में कहा कि जल, जंगल और जमीन हमारे जीवन का सबसे अहम हिस्सा हैं। इन्हें बचाकर रखना किसी एक इंसान की नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी सुरक्षित रह सकें।
संथाल परगना है वीरों की धरती, विरासत को आगे बढ़ाना हमारा फर्ज
इस खास मौके पर दुमका के DC अभिजीत सिन्हा ने जिले के सभी लोगों को विश्व आदिवासी दिवस की बधाई दी। उन्होंने लोगों को याद दिलाया कि संथाल परगना की यह धरती सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो और भगवान बिरसा मुंडा जैसे महान नायकों के संघर्ष से सींची गई है। इन वीरों का बलिदान आज भी हमें एक नई दिशा और प्रेरणा देता है। वहीं, जरमुंडी के विधायक देवेंद्र कुंवर ने भी मंच से लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हमारी माटी और परंपराएं ही हमारी सबसे बड़ी दौलत हैं। इन्हें सहेज कर अपनी आने वाली पीढ़ियों तक सही सलामत पहुंचाना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
पारंपरिक गीतों पर झूमे लोग, बंटी सरकारी योजनाओं की सौगात
महोत्सव का माहौल तब और भी खुशनुमा हो गया जब कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की छात्राओं और स्थानीय कलाकारों ने मंच संभाला। पारंपरिक गीत-संगीत और मनमोहक नृत्य ने वहां मौजूद हर एक शख्स को झारखंड की असली आदिवासी संस्कृति से रूबरू करा दिया। कलाकारों की कला देखकर पूरा कन्वेंशन सेंटर उत्साह और उल्लास से गूंज उठा। इस जश्न के साथ-साथ मंच से लोगों को सौगातें भी दी गईं। राज्य सरकार की कई अहम और जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों का वितरण किया गया, जिससे कार्यक्रम में आए लोगों के चेहरों पर खुशी दोगुनी हो गई।
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