बोकारो के तेतुलिया वनभूमि घोटाले में आरोपी शैलेश सिंह को हाईकोर्ट से राहत!
बोकारो जिले के बहुचर्चित तेतुलिया वनभूमि घोटाला मामले में मुख्य आरोपी शैलेश सिंह ने झारखंड हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की है।
Bokaro: बोकारो जिले के बहुचर्चित तेतुलिया वनभूमि घोटाला मामले में मुख्य आरोपी शैलेश सिंह ने झारखंड हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की है। बिहार की राजधानी पटना से सीआईडी (CID) द्वारा जुलाई 2026 में गिरफ्तार किए गए शैलेश सिंह की ओर से दायर जमानत अर्जी में कई तकनीकी खामियां (Defects) पाई गई थीं। इन गलतियों को दरकिनार कराने के लिए आरोपी की ओर से आईए (IA) दाखिल की गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत दी है।
न्यायाधीश अनिल कुमार की पीठ ने दी राहत
इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायाधीश अनिल कुमार की पीठ में हुई। अदालत ने मामले के तथ्यों पर विचार करते हुए शैलेश सिंह की जमानत याचिका में मौजूद तकनीकी त्रुटियों (Defects) को नजरअंदाज करने की अनुमति दे दी। इसके साथ ही अदालत ने स्टाम्प रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि इस जमानत याचिका को नियमानुसार दुरुस्त कर नए सिरे से सुनवाई के लिए कोर्ट में पेश किया जाए।
बेटे की कंपनी 'आयुष मल्टीकॉम' को बेची थी 74 एकड़ सरकारी जमीन
तेतुलिया वनभूमि घोटाले की परतें बेहद चौकाने वाली हैं। पूरा मामला 103 एकड़ वनभूमि से जुड़ा हुआ है। आरोपी अंसारी बंधुओं ने फर्जी कागजात तैयार कर सरकारी जंगल की जमीन पर अपनी पैतृक संपत्ति होने का झूठा दावा ठोका था। इसके बाद आरोपी शैलेश सिंह ने अंसारी बंधुओं से इस पूरी जमीन की बिक्री के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी अपने नाम करा ली। पावर मिलते ही शैलेश सिंह ने बड़ा खेल करते हुए 103 एकड़ में से 74 एकड़ वनभूमि अपने ही बेटे के नाम पर पंजीकृत कंपनी 'आयुष मल्टीकॉम' को बेच डाली।
तत्कालीन अंचल अधिकारी बर्खास्त, CID और ED के रडार पर मामला
इस महाघोटाले में अंचल कार्यालय के अधिकारियों की भूमिका भी उजागर हुई थी, जहां फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन का म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) अंसारी बंधुओं के नाम कर दिया गया था। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए तत्कालीन अंचल अधिकारी (CO) को सेवा से बर्खास्त कर दिया था। वन विभाग द्वारा जमीन पर अपना आधिकारिक दावा ठोकने के बाद सरकार ने पूरे मामले की जांच CID को सौंप दी थी। फिलहाल इस अरबों के वनभूमि फर्जीवाड़े की जांच CID के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी कर रही है।
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