झारखंड मानसून सत्र : स्पीकर ने याद दिलाया जनहित और अनुशासन का पाठ, अनुपूरक बजट समेत इन मुद्दों पर होगी चर्चा
विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने जनहित, संसदीय मर्यादा और अनुशासन पर जोर देते हुए बताया कि सत्र में वित्तीय वर्ष 2026-27 का प्रथम अनुपूरक बजट, प्रश्नकाल और अन्य महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों पर चर्चा होगी।

Jharkhand Assembly Monsoon Session: झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत गुरुवार को हुई। सत्र के पहले दिन सदन में दिवंगत पूर्व मंत्रियों, पूर्व विधायकों, देश-प्रदेश की प्रमुख हस्तियों, शहीद जवानों और अलग-अलग हादसों में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद विधानसभा की कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
सदन में दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए सभी सदस्यों ने दो मिनट का मौन रखा।
स्पीकर बोले- विधानसभा लोकतंत्र का सबसे बड़ा जनमंच
कार्यवाही शुरू होने पर विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने अपने प्रारंभिक संबोधन में कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का सर्वोच्च जनमंच है। संविधान ने विधानमंडलों को मुख्य रूप से तीन जिम्मेदारियां दी हैं।
इनमें विधेयकों पर चर्चा कर कानून बनाना, राज्य की वित्तीय व्यवस्था और बजट की समीक्षा व मंजूरी देना तथा सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह बनाए रखना शामिल है।
उन्होंने कहा कि इन जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाना ही लोकतांत्रिक व्यवस्था की सफलता का आधार है और इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर मानसून सत्र की कार्यसूची तय की गई है।
2026-27 का पहला अनुपूरक बजट होगा पेश
स्पीकर ने बताया कि मानसून सत्र के दौरान वित्तीय वर्ष 2026-27 का प्रथम अनुपूरक बजट सदन में पेश किया जाएगा। इसके अलावा पांच कार्य दिवस प्रश्नकाल के लिए रखे गए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल के जरिए विधायक जनहित के मुद्दे उठाकर सरकार से जवाब मांग सकते हैं। इससे शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है और जनता का भरोसा मजबूत होता है।
12 अगस्त को गैर सरकारी सदस्यों का कार्य
विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि 12 अगस्त को गैर सरकारी सदस्य का कार्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत विधायक जनहित से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार, सुझाव और प्रस्ताव सदन के सामने रख सकेंगे।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सदस्य इस मौके का इस्तेमाल संसदीय परंपराओं और सदन की गरिमा को ध्यान में रखते हुए करेंगे।
राष्ट्रीय औसत से ज्यादा चला झारखंड विधानसभा का सदन
रबींद्र नाथ महतो ने कहा कि पीआरएस के हालिया अध्ययन के मुताबिक वर्ष 2025 में देश के 28 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं की औसत बैठक 24 दिन रही।
वहीं, झारखंड विधानसभा पिछले साल 30 दिनों तक चली, जो राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। उन्होंने इसे सदस्यों की सक्रिय भागीदारी और संसदीय प्रतिबद्धता का नतीजा बताया।
स्पीकर ने उम्मीद जताई कि मानसून सत्र में भी सभी बैठकें गंभीरता, अनुशासन और रचनात्मक सोच के साथ चलेंगी।
सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों जरूरी, जनहित सबसे ऊपर
स्पीकर ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है। विज्ञान और तकनीक, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक चुनौतियों और विकास की नई जरूरतों ने सरकार के सामने नई जिम्मेदारियां खड़ी की हैं।
ऐसे समय में झारखंड के विकास, सामाजिक समरसता, खेती, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याण जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा जरूरी है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सिर्फ बहुमत से सरकार चलाने का नाम नहीं है। इसमें संवाद, सहनशीलता और दूसरे विचारों का सम्मान भी जरूरी है। सत्ता पक्ष और विपक्ष लोकतंत्र के दो महत्वपूर्ण हिस्से हैं। मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन जनहित हमेशा सबसे ऊपर होना चाहिए।
कई पूर्व मंत्रियों और विधायकों को दी गई श्रद्धांजलि
सदन में पूर्व परिवहन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री और गोमिया के पूर्व विधायक माधव लाल सिंह, पूर्व पशुपालन मंत्री एवं धनबाद के पूर्व विधायक मन्नान मलिक, पूर्व विधायक बेनी प्रसाद गुप्ता और हरि राम, पूर्व खनन मंत्री लक्ष्मण राम तथा पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री मुकुल रॉय को श्रद्धांजलि दी गई।
इसके अलावा डॉ. डीवाई पाटिल, पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी, गायिका आशा भोसले, शायर बशीर बद्र, संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप, वरिष्ठ पत्रकार एचके दुआ, लोक कलाकार तीजन बाई, निशानेबाज जसपाल राणा, क्रिकेटर गोपीनाथ और खोरठा साहित्यकार सुरेश विश्वकर्मा को भी सदन ने याद किया। झारखंड आंदोलनकारी कृष्ण कुमार महतो और दामू बांड्रा को भी श्रद्धांजलि दी गई।
शहीद जवानों और हादसों में जान गंवाने वालों को भी किया याद
सदन ने जम्मू-कश्मीर और मणिपुर में शहीद हुए जवानों को भी श्रद्धांजलि दी। इसके साथ ही उधमपुर सड़क हादसे, लखनऊ की आग, असम की बाढ़ और नीट परीक्षा विवाद के बाद आत्महत्या करने वाले छात्र-छात्राओं को भी श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यवाही के दौरान असम के बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए झारखंड सरकार की ओर से तीन करोड़ रुपये की सहायता दिए जाने का भी उल्लेख किया गया।
मांडू विधायक ने उठाया हादसों में मौत का मुद्दा
शोक प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मांडू विधायक निर्मल कुमार ने अपने क्षेत्र में सड़क हादसों, हाथियों के हमले, वज्रपात और खदान धंसने की घटनाओं में हुई मौतों का मुद्दा उठाया।
उन्होंने सरकार से मांग की कि इन घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को भी उचित आर्थिक सहायता दी जाए।
शुक्रवार सुबह 11 बजे फिर बैठेगा सदन
पहले दिन श्रद्धांजलि और शोक प्रस्ताव की कार्यवाही के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। अब मानसून सत्र में जनहित के मुद्दों, सरकार की योजनाओं और अनुपूरक बजट को लेकर सदन में चर्चा आगे बढ़ेगी।
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