'पति आरोपी तो पत्नी की गाड़ी आतंकी संपत्ति नहीं!', आम्रपाली-मगध कोयला लेवी केस में JH हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
आम्रपाली-मगध कोयला लेवी टेरर फंडिंग केस में झारखंड हाईकोर्ट ने आरोपी बिनोद गंझू की पत्नी की TVS स्कूटी जब्ती से मुक्त कर दी। JCB और मकान की जब्ती बरकरार रही।

Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट ने टंडवा के आम्रपाली-मगध कोयला क्षेत्र में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन TPC के नाम पर लेवी वसूली से जुड़े टेरर फंडिंग मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट के जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने आरोपी बिनोद गंझू की पत्नी के नाम दर्ज TVS स्कूटी को आतंकी गतिविधियों से अर्जित संपत्ति मानने से पूरी तरह इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्कूटी को जब्ती से मुक्त कर वापस लौटाने का आदेश दिया है, लेकिन JCB लोडर और दो मंजिला मकान की संपत्ति पर लगी जब्ती को बरकरार रखा है।
NIA की विशेष अदालत के आदेश को दी गई थी चुनौती
यह पूरी अपील NIA यानी नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी की विशेष अदालत द्वारा 18 जुलाई 2023 को सुनाए गए उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें जब्त संपत्तियों को छोड़ने की याचिका खारिज कर दी गई थी। इस मामले की शुरुआत साल 2016 में हुई थी, जब पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि टंडवा कोयला क्षेत्र में कुछ लोग TPC के नाम पर कोयला कारोबारियों से भारी लेवी वसूल रहे हैं। पुलिस छापेमारी में बिनोद गंझू के घर से 91.75 लाख रुपये और प्रवीण राम के घर से 57.57 लाख रुपये कैश बरामद हुए थे।
2018 में NIA ने हाथ में ली जांच, UAPA के तहत हुई कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच में UAPA यानी गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम की धाराएं जोड़ी गईं और 2018 में NIA ने पूरे केस को टेकओवर कर लिया। जांच के दौरान बिनोद गंझू और उसके परिजनों के नाम दर्ज कई चल-अचल संपत्तियों को जब्त किया गया था। इनमें 26 डिसमिल जमीन पर बना दो मंजिला मकान, पत्नी के नाम दर्ज स्कूटी और एक JCB लोडर जैसी कई संपत्तियां शामिल थीं।
पत्नी खुद CCL कर्मी, आय के आधार पर खरीदी गई थी स्कूटी
हाईकोर्ट ने पत्नी की स्कूटी की जब्ती रद्द करते हुए एक बेहद अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि स्कूटी बिनोद गंझू की पत्नी के नाम पर है और वह खुद CCL यानी सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड में कार्यरत हैं। उनकी अपनी स्वतंत्र आय है और इसी वित्तीय क्षमता के आधार पर स्कूटी खरीदी गई थी। सिर्फ इसलिए कि वह बिनोद की पत्नी हैं, उनकी निजी संपत्ति को टेरर फंडिंग से खरीदी गई संपत्ति नहीं माना जा सकता। अदालत ने पहचान सत्यापित कर स्कूटी को तुरंत वापस करने का निर्देश दिया।
JCB और दो मंजिला मकान की जब्ती क्यों रही बरकरार?
दूसरी ओर, कोर्ट ने JCB लोडर और दो मंजिला मकान की जब्ती को सही ठहराया। JCB को लेकर कोर्ट ने कहा कि इसे खरीदने के लिए केवल 82 हजार रुपये की किस्त रसीद दिखाई गई, लेकिन इतनी महंगी मशीन के लिए असल कमाई या लोन के जरूरी दस्तावेज पेश नहीं किए गए। वहीं, दो मंजिला मकान के मामले में कोर्ट ने पाया कि भले ही जमीन 1990 में मां के नाम खरीदी गई थी, लेकिन मकान निर्माण में लगे पैसे का कोई वैध हिसाब नहीं दिया गया। निर्माण के स्वीकृत नक्शे और अनुमतियों का रिकॉर्ड न होने के कारण कोर्ट ने JCB और मकान की जब्ती को सही माना।
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