झारखंड सूचना आयोग में आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में अड़चन ! सरकार की भेजी फाइल राज्यपाल ने लौटाई
सूचना आयुक्तों के 4 पदों के लिए राज्य सरकार ने राज्यपाल को नामों की अनुशंसा भेजी थी जिसमें से तीन किसी न किसी पार्टी से संबंधित हैं कमेटी की अुनशंसा पर सरकार ने जिन नामों को स्वीकृति के लिए राज्यपाल को भेजे थे उनमें...

Ranchi News: झारखंड में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया एक बार फिर विवादों और कानूनी पेंच में फंस गई है. दरअसल, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने राज्य सरकार द्वारा भेजी गई फाइल वापस लौटा दी है. उन्होंने राजनीतिक दलों से जुड़े नामों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए फाइल वापस की है. इस संबंध में लोक भवन की ओर से कहा गया है कि राज्य सरकार ने क्या RTI एक्ट के नियमों के तहत सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए नामों की अनुशंसा की है ? सरकार इसपर पुनर्विचार करें और इसके बाद फिर से फाइल भेजें.
आपको बता दें, सूचना आयुक्तों के 4 पदों के लिए राज्य सरकार ने राज्यपाल को नामों की अनुशंसा भेजी थी जिसमें से तीन किसी न किसी पार्टी से संबंधित हैं कमेटी की अुनशंसा पर सरकार ने जिन नामों को स्वीकृति के लिए राज्यपाल को भेजे थे उनमें वरिष्ठ पत्रकार अनुज सिन्हा के अलावा JMM (झारखंड मुक्ति मोर्चा) के आईटी सेल प्रभारी तनुज खत्री, प्रदेश कांग्रेस महासचिव अमूल्य नीरज खलखो और प्रदेश BJP के मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक के के नाम शामिल हैं.
आपको बता दें ,सूचना आयुक्तों की नियुक्ति मामले को लेकर आगामी 13 अप्रैल 2026 को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है. इससे पहले इन पदों को हाईकोर्ट ने शीघ्र भरने को कहा है. जिसपर सरकार ने 7 अप्रैल तक नियुक्ति करने की बात कोर्ट में कही थी. बता दें, झारखंड सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त के अलावे सूचना आयुक्त के पद हैं, जो पारदर्शिता की कमी के आरोप और हाईकोर्ट में मामला पहुंचने की वजह से लंबे समय (2020) से रिक्त हैं.
बता दें, बीते 25 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में चयन समिति की बैठक बुलाई गई थी जिसमें सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए सूची को अंतिम रूप देते हुए राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार की अनुशंसा के लिए लोक भवन, रांची भेजा गया था. अगर इसपर राज्यपाल की सहमति होती तो कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा सूचना आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी अधिसूचना जारी कर दिया जाता, लेकिन यह मामला एक बार फिर कानूनी पेंच में फंस गई.
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