कोरोना से कहीं ज्यादा खतरनाक है इबोला वायरस ! युगांडा से भारत आई एक महिला में दिखा संदिग्ध गंभीर लक्षण
कोरोना के मुकाबले इबोला वायरस में मरीजों की जान जाने का खतरा कई गुना ज्यादा है. कोरोना में मृत्युदर औसतन 1 से 2 फीसदी के मध्य रहा है लेकिन इबोला वायरस के संक्रमण आने वाले लगभग 50 फीसदी मरीजों की जान चली जाती है.

Ebola virus transmission: महामारी कोरोना को लोगों ने अभी ठीक से भूला भी नहीं था कि इस बीच अब फिर से एक खतरनाक वायरस ने अपना पांव पसारना शुरू कर दिया है. हेल्थ एक्सपार्ट्स के अनुसार, इबोला वायरस कोरोना वायरस से भी कहीं ज्यादा खतरनाक है. लेकिन इबोला वायरस को लेकर राहत वाली बात है कि इसके फैलने की रफ्तार काफी धीमी है.
WHO ( वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन) के अनुसार, कोरोना के मुकाबले इबोला वायरस में मरीजों की जान जाने का खतरा कई गुना ज्यादा है. कोरोना में मृत्युदर औसतन 1 से 2 फीसदी के मध्य रहा है लेकिन इबोला वायरस के संक्रमण आने वाले लगभग 50 फीसदी मरीजों की जान चली जाती है.
इबोला वायरस ने अफ्रीकी देशों में उत्पात मचाकर रखा है अब यह धीरे-धीरे अफ्रीका से बाहर भी अपना पैर पसार रहा है. जानकारी के अनुसार, भारत में 28 वर्ष की एक महिला में इबोला वायरस जैसे संदिग्ध और गंभीर लक्षण दिखे हैं दरअसल, महिला हाल ही में युगांडा से भारत वापस लौटी है. एक रिपोर्टस के मुताबिक, महिला के इस वक्त मेडिकल फैसिलिटी में क्वारंटीन कर रखा गया है और एहतियात के रुप में जांच शुरु कर दी गई है.
जानकारी के अनुसार, मंगलवार को महिला को बेंगलुरु के सरकारी अस्पताल में ऑब्जर्वेशन के लिए आइसोलेट किया गया है. महिला अहमदाबाद होते हुए बेंगलुरु पहुंची थी, उसे हल्का दर्द है, लेकिन इबोला वायरस के गंभीर लक्षण नहीं है और उसकी तबीयत स्थिर है.
अफ्रीकी देश युगांडा, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और दक्षिणी सूडान जैसे देशों में इबोला वायरस से हाहाकार मची है इस वायरस की वजह से अब तक कुल 200 से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवाई है जबकि इसके मामले हजार से ज्यादा सामने आए हैं. आपको बता दें, इबोला वायरस काफी घातक इसीलिए माना जाता है क्योंकि इस वायरस से संक्रमित मामलों में मृत्यु दर 50 से 90 फीसदी तक पहुंच सकता है.
कोरोना से कितना खतरनाक है इबोला वायरस?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, इबोला वायरस में मरीजों की जान जाने का खतरा कोरोना वायरस से कहीं अधिक है. लेकिन इसके ट्रांसमिशन रेट कोरोनो के मुकाबले काफी धीमी हैं यानी इबोला वायरस का एक से दूसरे इंसान में फैलने की रफ्तार कोरोना के मुकाबले काफी धीमी है. वजह यही है कि इस वायरस का वैश्विक महामारी (ग्लोबल पेंडेमिक) बनने का रिस्क काफी कम है. WHO और इंटरनेशनल हेल्थ गाइडलाइंस की रिपोर्ट्स भी इसकी पुष्टि करती हैं कि खतरनाक इबोला वायरस का दायरा केवल सीमित इलाकों तक ही सिमट कर रह जाता है.
क्या हैं इबोला वायरस के लक्षण
कोरोना के मुकाबले इबोला एक बेहद घातक और संक्रामक वायरल बीमारी है. जिसके कारण हेमोरेजिक फीवर (बुखार) गंभीर रक्तस्राव और इंसान के ऑर्गन तक के खराब होने की संभावना बनी रहती है. इसका फैलाव इस वायरस से संक्रमित किसी व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों ( लार, खून, पसीना और अन्य) के सीधे संपर्क में आने से होता है. इस वायरस का अबतक कोई दवा या टीका नहीं है जिससे यह वायरस काफी जानलेवा साबित हो रहा है. इस वायरस के शुरुआती लक्षणों में मरीज को सिर दर्द, तेज बुखार, गले में सूजन या फिर दर्द और अत्यधिक थकान का होना हो सकती है.
कैसे करें इस वायरस से खुद का बचाव
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इबोला वायरस बेदह खतरनाक और जानलेवा है हालांकि, इसको लेकर पैनिक करने की जरूरत नहीं है, लेकिन अलर्ट रहना इसका सबसे बड़ा इलाज है.
-इबोला से ग्रसित अफ्रीकी देश कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा करने से परहेज करें.
-प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले लोगों के संपर्क में न आएं और एहतियात बतरते हुए नियमित रूप से सैनिटाइजर या साबुन-पानी का इस्तेमाल करें.
-अगर यदि कोई व्यक्ति हाल ही में इबोला प्रभावित अफ्रीकी देशों से लौटा है, तो एयरपोर्ट पर उसका थर्मल स्क्रीनिंग कराएं और अगले 21 दिनों तक बुखार या बदन दर्द जैसे लक्षणों की खुद मॉनिटरिंग करें.
-अगर लक्षण दिखता है तो मरीज को तुरंत बाकी लोगों से दूर या अलग (Isolate) करें और इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दें.
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