CM हेमंत सोरेन ने 20 'वन मित्रों' को किया सम्मानित, जलवायु परिवर्तन से निपटने का दिया मंत्र
रांची में आयोजित 77वें राज्यव्यापी वन महोत्सव-2026 में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 20 वन मित्रों एवं समिति प्रतिनिधियों को सम्मानित किया।

Ranchi: रांची के खेलगांव स्थित हरिवंश टाना भगत इंडोर स्टेडियम में शुक्रवार को 77वें राज्यव्यापी वन महोत्सव-2026 का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी विधायक कल्पना सोरेन ने मुख्य रूप से भाग लिया। दोनों ने मंच से पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों के बीच वृक्षारोपण को पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम बताया और सभी से अधिक से अधिक पौधे लगाने का आह्वान किया।
विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन है जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन विश्व की सबसे गंभीर चुनौती बन चुका है। औद्योगीकरण, खनन, शहरीकरण और अनियोजित विकास के कारण पर्यावरण पर व्यापक असर पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास की गति को बनाए रखते हुए प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के बीच संतुलन स्थापित करना समय की सबसे बड़ी मांग है। जल, जंगल और जमीन का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करके ही आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य दिया जा सकता है।
हर नागरिक उठाए एक पौधा लगाने की जिम्मेदारी
राज्यवासियों को प्रेरित करते हुए सीएम सोरेन ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर व्यक्ति का सामाजिक दायित्व है। उन्होंने अपील की कि प्रत्येक नागरिक कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसके बड़े होने तक उसकी देखभाल करे। जनभागीदारी के जरिए ही झारखंड को हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक मिसाल बनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में लगाए गए पौधों की स्थिति का वे स्वयं जायजा लेंगे।
मानव जीवन के साथ वन्यजीवों पर भी मंडरा रहा खतरा
जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अनियमित वर्षा, भीषण गर्मी और प्राकृतिक आपदाओं में लगातार वृद्धि हो रही है। इसका सीधा असर कृषि और ग्रामीण आजीविका पर पड़ रहा है। असम सहित अन्य राज्यों में बाढ़ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आवासों के छिनने से वन्यजीवों और पशु-पक्षियों के अस्तित्व पर भी संकट आ गया है। जंगलों के सिकुड़ने से जंगली जानवर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
स्थानीय और उपयोगी वृक्षों के रोपण को मिलेगी प्राथमिकता
वृक्षारोपण अभियानों की रूपरेखा पर बात करते हुए सीएम ने कहा कि राज्य में ऐसे वृक्षों को प्राथमिकता दी जाएगी जो मानव जीवन, वन्यजीवों और जैव विविधता के लिए उपयोगी हों। सिर्फ संख्या बढ़ाना उद्देश्य नहीं है, बल्कि फलदार, छायादार और औषधीय पौधों को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे मिट्टी की उर्वरता और भूजल संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
उत्कृष्ट कार्य के लिए 20 वन मित्र हुए सम्मानित
महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वन संरक्षण, जैव विविधता और सामुदायिक वन प्रबंधन के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने वाले राज्य के विभिन्न वन प्रमंडलों के 20 वन मित्रों एवं समिति प्रतिनिधियों को सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में रांची से फुलवीन बेरनादेत कुजूर व तारकेश्वर मुंडा, घाटशिला से टिकैत चन्द्र प्रधान, दुमका से बुधदेव चालक, चाईबासा से पौथीराम हांसदा व रमेश नायक, गुमला से निरोज टेटे, झारखंड जैव-विविधता परिषद की सोनी देवी, साहेबगंज से लक्ष्मण मुर्मू व राजीव रंजन प्रसाद सहित सिमडेगा, कोडरमा, गिरिडीह, पलामू, हजारीबाग और चतरा के कई प्रतिनिधि शामिल रहे। इस अवसर पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
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