B.Ed. छात्रा को शर्ट-पैंट पहनने पर किया गया क्लास से बाहर, छात्रा का आरोप- लड़कों वाले कपड़े को लेकर कॉलेज बना रही दबाव
गोड्डा बीएड कॉलेज की छात्रा मोना भारती का कॉलेज पर आरोप है कि उसे शर्ट-पैंट पहनने के कारण क्लास करने नहीं दिया जा रहा. उनका कहना है कि निर्देशों में ऐसा कहीं जिक्र नहीं है लड़कियों को केवल सलवार-सूट ही पहनना है.

Jharkhand (Godda): B.Ed. की जिस पढ़ाई को पूरी करने के बाद छात्राएं स्कूलों में समानता आदि के अधिकारों को पढ़ाएंगी, उन्हीं को समानता नहीं दी जा रही. मामला गोड्डा कॉलेज गोड्डा से संबंधित है, जहां B.Ed की छात्रा मोना भारती ने आरोप लगाया है कि उसे ड्रेस कोड वाले कपड़े पहनने से ही रोका जा रहा है. दरअसल वह सलवार सूट की जगह शर्ट-पैंट पहन कर आती हैं. उनका कहना है कि इसी कपड़ों में उन्हें कंफर्ट महसूस होता है.

2025 में लिया था दाखिला, तब किसी ने नहीं जताई आपत्ति
छात्रा मोना भारती ने आरोप लगाया है कि शर्ट और पैंट पहनकर कॉलेज आने के कारण उन्हें क्लास में प्रवेश नहीं करने दिया गया और कॉलेज परिसर से बाहर कर दिया गया. मोना भारती का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2025 में B.Ed. पाठ्यक्रम में दाखिला लिया है. कॉलेज प्रशासन की ओर से जारी ड्रेस कोड सूचना में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि छात्राओं को अनिवार्य रूप से सलवार-सूट ही पहनना होगा. छात्रा के अनुसार, उन्होंने इसी कॉलेज से पहले ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की थी और उस दौरान भी वह शर्ट-पैंट पहनकर ही कॉलेज आती थीं, तब न तो किसी प्राचार्य और न ही किसी शिक्षक ने इस पर आपत्ति जताई थी.
B.Ed. में दाखिले के बाद बनाया जा रहा दबाव
परीक्षा और नियमित कक्षाओं में भी कभी रोका नहीं गया. लेकिन B.Ed. में एडमिशन के बाद उनके पहनावे को लेकर सवाल उठाए जाने लगे. मोना ने आरोप लगाया कि पिछले कई दिनों से कॉलेज के कुछ प्रोफेसरों द्वारा उन पर दबाव बनाया जा रहा है और यह कहते हुए क्लास से बाहर कर दिया जा रहा है कि वह लड़कों जैसे कपड़े पहनकर कॉलेज क्यों आ रही हैं.

"जो ड्रेस कोड है, उसे फॉलो हर हाल में करना होगा"
छात्रा का कहना है कि वह इसी ड्रेस में खुद को सहज महसूस करती हैं और पढ़ाई करना चाहती हैं. इस मामले पर कॉलेज के प्राचार्य डॉ. विवेकानंद सिंह ने कहा कि कॉलेज के ड्रेस कोड के अनुसार सभी छात्र-छात्राओं को आना अनिवार्य है. उन्होंने कहा कि छात्राओं को लड़कियों की तरह सूट पहनकर कॉलेज आना चाहिए. प्राचार्य ने यह भी कहा कि यदि छात्रा के पास सूट खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं, तो उसका खर्च वह स्वयं उठाने को तैयार हैं.
कॉलेज द्वारा जारी निर्देशों में नहीं है कहीं जिक्र
हालांकि, छात्रा का कहना है कि कॉलेज प्रशासन द्वारा जारी लिखित निर्देशों में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग ड्रेस कोड का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है. मोना ने यह भी सवाल उठाया कि जब कॉलेज में जेंडर इक्वलिटी और वूमेन पावर जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं, तो व्यवहार में उनके साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है. इसके साथ ही मोना ने नक्षत्र न्यूज से बातचीत में बताया कि उन्हें कॉलेज में जेंडर इक्वलिटी और वूमेन पावर के बारे में पढ़ाया जाता है, लेकिन दूसरी ओर उन्हें यह बताया जाता है कि वह लड़की है और अपने लड़की के हद में ही रहे.
रिपोर्ट: प्रिंस यादव









