जेनरेटर के नाम पर करोड़ों का खेल? सुपौल में जनसुराज ने उठाए बड़े सवाल
सुपौल में स्वास्थ्य विभाग की जेनरेटर सेवा को लेकर जनसुराज ने सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका जताई है। संगठन ने अलग-अलग जिलों में जेनरेटर के किराये और प्रति घंटे की दर में अंतर का हवाला देते हुए राज्यस्तरीय जांच की मांग की है।


सुपौल: स्वास्थ्य विभाग में जेनरेटर सेवा के नाम पर सरकारी राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए जनसुराज ने राज्यस्तरीय जांच की मांग की है। जनसुराज के सुपौल जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने पटना में स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव कुमार रवि से मुलाकात कर मामले की जानकारी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि मेसर्स सिंह सर्विसेज, नालंदा और मेसर्स कृष्णा कंस्ट्रक्शन कंपनी, पटना को कई जिलों में जेनरेटर सेवा का काम देकर किराये और प्रति घंटे की दर में भारी अंतर के माध्यम से करोड़ों रुपये का खेल किया जा रहा है।
अलग-अलग जिलों में किराये को लेकर सवाल
अनिल कुमार सिंह के अनुसार, अररिया में 10 केवीए जेनरेटर का मासिक किराया 69 हजार रुपये से लेकर 500 केवीए का 2.55 लाख रुपये तक निर्धारित है। पटना में 10 KVA के लिए 70 हजार और 320 केवीए के लिए दो लाख रुपये प्रतिमाह किराये का प्रावधान बताया गया है। इसके विपरीत कटिहार में तीसरी एजेंसी को काम मिलने पर जेनरेटर का मासिक किराया शून्य होने का दावा किया गया है। प्रति घंटे की दर में भी बड़ा अंतर बताया गया है। कटिहार में 200 केवीए के लिए 1,200 रुपये प्रति घंटा, जबकि पटना में इसी क्षमता के लिए 4,900 रुपये प्रति घंटा भुगतान का दावा किया गया है।
निविदा प्रक्रिया को लेकर भी उठे सवाल
जनसुराज का आरोप है कि सुपौल में पूर्व की जेनरेटर सेवा व्यवस्था में अलग से मासिक किराया नहीं दिया जाता था। नई व्यवस्था में 100 केवीए के लिए 1.30 लाख, 200 केवीए के लिए 1.75 लाख और 300 केवीए के लिए 2.95 लाख रुपये प्रतिमाह किराया निर्धारित किया गया है। संगठन का दावा है कि केवल एक वर्ष के किराये की राशि से नए जेनरेटर खरीदे जा सकते हैं।
बार-बार निविदा रद्द करने का आरोप
सुपौल में निविदा प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि नवंबर 2025 से मई 2026 के बीच निविदा प्रकाशित, रद्द और संशोधित करने की कई प्रक्रियाएं हुईं। अंततः मेसर्स सिंह सर्विसेज नालंदा, मेसर्स कृष्णा कंस्ट्रक्शन कंपनी पटना और मेसर्स विवेकानंद सिंह भागलपुर को कार्यादेश दिए गए।
अनिल कुमार सिंह ने आरोपों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। प्रधान सचिव कुमार रवि ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य स्तर पर जांच कमेटी गठित कर जांच कराने का आश्वासन दिया है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
(सुपौल से कुंदन कुमार की रिपोर्ट)

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